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बार-बार भागकर बंकर में छिपना पड़ता था

रुसी सेना के हमलों के बीच चल रही थी आनलाइन क्लास

यूपी भवन ले जाकर खाना खिलाया और प्रदेश सरकार ने घर छुड़वाया

कानपुर( अनुराग दर्शन समाचार )। कीव खारकीव,विनिट्सिया और अन्य शहरों में 24 फरवरी को रूसी सेना बम बरसा रही थी, दूसरी तरफ विनिट्सिया विवि में हमारी आनलाइन क्लास चल रही थी। 100 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी है,ऐसे में क्लास छोड़ नहीं सकते थे। 26 फरवरी से शहर में भी हमले होने लगे। बिल्डिंग के आसपास बम और मिसाइलें गिर रही थीं। बार-बार भागकर बंकर में छिपना पड़ता था। खुद बसें बुक करके बार्डर तक पहुंचे। यहां हालात और भी ज्यादा खौफनाक थे। यूक्रेनी सेना हवाई फायरिंग कर रही थी। न ठीक से सो सके,न ही खाना-पानी मिला। बार्डर पार करने के बाद रोमानिया सरकार के वालंटियर्स ने मदद की। आवास विकास एक कल्याणपुर की सताक्षी सचान शुक्रवार देर रात यूक्रेन से कानपुर लौटी। सताक्षी विनिटसिया नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष की छात्रा हैं। वह शुक्रवार को उसी विवि में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा गुजैनी निवासी दिव्यांशी सचान के साथ भारत लौटीं। सनिगवां निवासी प्रदीप कुमार भी कठिनाइयों को पारकर शुक्रवार को घर पहुंचे। प्रदीप ने बताया कि 24 फरवरी की रात नौ बजे पूरे देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई थी। 25 को सुबह से ही हवाई हमले होने लगे। पहले कहा गया था कि 26 फरवरी को एयर इंडिया हमें वहां से निकालेगी, लेकिन मदद नहीं मिल सकी। 27 फरवरी को हम बार्डर पहुंचे तो मौसम खराब होने के कारण और भी ज्यादा परेशान हो गए। काफी इंतजार के बाद 28 तारीख को बार्डर पार किया। तब माइनस छह डिग्री तापमान था। रोमानिया में बर्फबारी हो रही थी। वहां की सेना और लोगों ने काफी मदद की। पहले हमें एक इनडोर स्टेडियम में रखा गया। इसके बाद एक मार्च को बस से 400 किलोमीटर दूर बुचारेस्ट लाया गया। तीन मार्च की सुबह हम ग्लोबमास्टर से हिंडन एयरपोर्ट पर उतरे।

*एयरफोर्स के ग्लोबमास्टर से भारत पहुंचे*

चकेरी के सनिगवां निवासी राघवेंद्र सिंह चंदेल के बेटे नवनीत सिंह चेर्निविस्टी मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। नवनीत ने बताया कि यूक्रेन से भारत के लिए केवल एक ही फ्लाइट थी, जबकि वहां फंसे छात्रों की संख्या 20 से 22 हजार थी। दूतावास की ओर से एडवाइजरी जारी होने के बाद तमाम छात्रों ने 22 फरवरी से 11 मार्च तक विभिन्न फ्लाइट की टिकट बुक कराई, लेकिन 22 को ही फ्लाइट जा सकी फिर एयर स्पेस बंद कर दिया गया। वहां के एक डॉक्टर सुनील शर्मा की मदद से हम 27 फरवरी की रात रोमानिया बार्डर के लिए चले और 28 की रात 11 बजे इसे पार किया। इसके बाद हमें बुचारेस्ट के फ्रंटियर होटल में रखा गया। दो मार्च को एयरफोर्स के ग्लोबमास्टर से 210 लोगों को गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट पर उतारा गया। यहां से यूपी भवन ले जाकर खाना खिलाया और प्रदेश सरकार ने घर छुड़वाया। इधर, बेटे के आने पर मां उमा सिंह ने उन्हें गले से लगा लिया।

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