अनुसूचित जाति के लोग कर रहे ‘घर वापसी’

जूना अखाड़ा के पहले दलित महामंडलेश्वर स्वामी कन्हैया प्रभुनंद गिरि की पहल
9200 बच्चों को दिला रहे वैदिक शिक्षा
( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। भय, लोभ व अज्ञानता के कारण सनातन धर्म छोड़ने वाले लोग अब तेजी से ‘घर वापसी’ कर रहे हैं। ईसाई, बौद्ध और इस्लाम धर्म अपनाने वाले हजारों लोग पुनः सनातन धर्म में लौटे हैं। देशभर में 50 हजार से अधिक अनुसूचित जाति, जनजाति, आदिवासी कोल और भील लोग सनातन धर्म में लौटे हैं, जिन्होंने दूसरा धर्म अपना लिया था। ऐसे लोगों को सनातन धर्म में शामिल कराने का व्यापक अभियान जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी कन्हैया प्रभु नंद गिरि व्यापक स्तर पर चला रहे हैं। महामंडलेश्वर स्वामी कन्हैया प्रभु नंद अनुसूचित जाति के पहले जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर हैं। उन्होंने शनिवार को बताया कि सनातन धर्म से लोगों को जोड़ने का बीड़ा उठाया है। अभी तक उत्तर प्रदेश में 15 हजार, मध्य प्रदेश में 12 हजार, महाराष्ट्र में 10 हजार, पंजाब व गुजरात में पांच-पांच हजार लोगों ने घर वापसी किया है। अभी सनातन धर्म और संस्कृति को अपना कर जीवनयापन कर रहे हैं। इसमें से कुछ लोगों को जून महीने में संगम स्नान कराकर दीक्षित किया जाएगा। इसी सिलसिले में महामंडलेश्वर स्वामी कन्हैया प्रभुनंद गिरि ने शुक्रवार को यमुनापार के कोरांव के आदीवासी क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासियों से मिलकर सुरक्षा और हर स्तर की मदद दिलाने का भरोसा देकर उन्हें पुनः सनातन धर्म में लौटने को प्रेरित किया। बताते हैं कि उसमें काफी लोग उनकी बातों से सहमत हो गए हैं। उन्हें सनातनी बनाने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें वैदिक शिक्षा दिलाई जा रही है।
महामंडलेश्वर स्वामी कन्हैया प्रभुनंदन गिरि बताते हैं कि देशभर में लगभग 9200 बच्चों को वैदिक शिक्षा अयोध्या, वृंदावन, काशी, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार स्थित वेद विद्यालयों में दाखिला देकर दिलाया गया है। इससे उनका और उनके परिवार के लोगों का सनातन धर्म के प्रति लगाव हो रहा है। साथ ही संस्कृत का ज्ञान प्राप्त करके वह आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में आजमगढ़ में भी संस्कृत विद्यालय और गरीब लोगों के लिए माडर्न अस्पताल बनवाया जाएगा।


