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बिना बुलावा के कहीं नही जाना चाहिए: शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। नैनी अरैल स्थित नागेश्वर धाम में अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक व शंकराचार्य महेशाश्रम जी ने स्थानीय लोगों को अपना आशीर्वाद देते हुए भक्तों से कहा बिना बुलावा के कंही भी नही जाना चाहिए,वो चाहे स्त्रियों का मायका ही क्यों ना हों। सती जी ने अपने पति भोलेनाथ की बात नही मानी और बिना बुलावे के ही पिता दक्ष के यज्ञ में गयी। जहां उन्हें अपमानित होना पड़ा और अपने पति के साथ हों रहे व्यवहार को देखकर यज्ञ की अग्नि में अपने शरीर को त्याग करना पड़ा। उक्त बातें बताते हुए स्वामी महेशाश्रम जी ने बताया की चित्रकूट में एक महाभागवत का आयोजन होने जा रहा है । श्रीमद् भागवत कथा स्वामी जी के मुखारविंद से होगा। स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि जब भगवान शंकर ने सती के देह त्याग का समाचार सुना तो क्रोधित होकर अपने जटा का एक बाल पटका, जिससे बीरभद्र प्रकट हुए।शंकर जी की आज्ञा से दक्ष के यज्ञ का विध्वंश करते हुए उनका सर काटकर यज्ञ कुंड में डाल दिया।ऋषियो आदि की प्रार्थना पर भोलेनाथ ने दक्ष के धड़ पर बकरे का सर लगा कर जीवित कर दिया।दक्ष ने अपनी गलती को स्वीकारते हुए भगवान भोलेनाथ की बड़ी ही सुंदर स्तुति किया।बाद में सती ने पार्वतीजी के रूप में हिमांचल के यंहा जन्म लिया और पुनः अपने पति के रूप में शंकर जी को प्राप्त किया।

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