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मंदिर मस्जिद विवादः श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने रखा अपना मत

 

संस्थान पदाधिकारी बोले मामला मालिका हक का नहीं, भूमि पर अवैध कब्जे का है

संस्थान पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता आयोजित कर रखा अपना पक्ष

मथुरा ( अनुराग दर्शन समाचार ) । श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के बीच अपना मत रखा है। संस्थान ने दावा किया है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान का स्पष्ट मत है कि विवाद संपत्ति के मालिकाना हक का नहीं, जबकि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान की भूमि पर अवैध कब्जे का है। गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता आयोजित कर अपना पक्ष रखा। संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और हिन्दूवादी नेता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि राजा पटनीमल्ल द्वारा ब्रिटिश सरकार से नीलामी में खरीदी गई कुल 15.70 एकड़ भूमि में से वृंदावन रेलवे लाइन के लिए 2.33 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। ईदगाह मस्जिद को लेकर विभिन्न न्यायालयों में चल रहे मुकदमों के संबंध में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान का स्पष्ट मत है कि राजा पटनीमल्ल के उत्तराधिकारी राय कृष्णदास से क्रय की गई कुल 13.37 एकड़ भूमि का निर्विवाद स्वामित्व श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के पास ही है। आज विषय जमीन के मालिकाना हक का ही नहीं, विषय है श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के स्वामित्व की भूमि पर स्थित ईदगाह पर मुस्लिम पक्ष के अवैध कब्जे का है। 16 मार्च 1815 को ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कटरा केशव देव परिसर को नजूल भूमि के रूप में खुली नीलामी कर राजा पटनीमल बहादुर को बिक्री कर दिया गया था। राजा पटनीमल के वंशज व उनके बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, संघ व मथुरा के मुसलमानों के मध्य वर्ष 1832, 1897, 1920, 1921, 1928, 1929, 1932, 1946, 1955, 1956, 1958, 1959, 1960, 1961, 1965 तक चले सभी मुकदमों व उनकी अपील पर रिवीजन के निर्णयों में सदैव हिन्दू पक्ष को ही कटरा केशव देव का स्वामी माना जाता रहा। मुसलमानों को अधिकार न होने पर भी केवल ईद के अवसर पर नमाज पढ़ने की सुविधा का उल्लेख होता रहा। जिसका उल्लंघन कर वर्ष 1986 के पश्चात ईदगाह परिसर में पांचों वक्त की नमाज का सिलसिला शुरू करने पर संस्थान द्वारा अपनी आपत्ति जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत की गई। वर्ष 1974 में समझौते के आधार पर हुई डिक्री की जानकारी प्राप्त होने के बाद ट्रस्ट द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ नाम को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान में परिवर्तित करने का निर्णय लेकर समझौते से लिप्त रहे संघ के पदाधिकारी विशेष को पदमुक्त भी कर दिया था। नियमानुसार संपूर्ण संपत्ति ट्रस्ट में निहित है।

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