परीक्षा से तीन साल के लिए डिबार करने का आदेश रद्द
ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा मामले में मिली राहत
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में एक अभ्यर्थी की मूल व कार्बन ओएमआर शीट में अंतर न होने की सचिव की रिपोर्ट के बाद तीन साल तक परीक्षा में बैठने से डिबार करने के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही एसटीएफ जांच जारी रखने की छूट देते हुए कहा कि एसटीएफ जांच में याची को क्लीन चिट मिलती है तो भविष्य में परिणाम घोषित किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने अभिजीत सिंह की याचिका अधिवक्ता एमए सिद्दीकी को सुनकर दिया है।
मामले के तथ्यों के अनुसार उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 30 मई 2018 को ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, व समाज कल्याण पर्यवेक्षक पद की भर्ती निकाली। याची भी परीक्षा में बैठा। उसकी मूल ओएमआर शीट व ट्रेजरी में रखी कार्बन शीट में अंतर होने पर लखनऊ के विभूति खंड थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसकी जांच एसटीएफ कर रही है। इसके आधार पर याची को तीन वर्ष के लिए आयोग की परीक्षाओं में बैठने पर रोक लगा दी गई। याचिका में इसे चुनौती देते हुए याची ने आरोपों से इनकार कर दिया और ओएमआर शीट तलब करने की मांग की। कोर्ट के निर्देश पर मूल ओएमआर शीट व कार्बन कॉपी पेश की गई। कोर्ट ने दोनों शीट में कोई अंतर नहीं पाया तो सचिव से रिपोर्ट मांगी।




