गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त कणाद ऋषि की देन है: डॉ त्रिपाठी

भारतीय गणितज्ञों की खोजों का चुराना मार्कोपोलो के समय शुरू
प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। आज की थ्योरी विदेशियों के नाम से चल रही है। गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का प्रतिपादन सर्वप्रथम कणाद ऋषि ने न्यूटन से बहुत पहले अपने ग्रन्थ वैशेषिक में कर दिया था। माधव ऋषि ने गणितीय सिरीज कोलिबनीट्ज के सिरीज से कई वर्षों पूर्व ही अपने ग्रन्थों में वर्णित कर दिया था। यह भारतीय गणितज्ञों की खोजों को चुराया जाना तब से प्रारम्भ हुआ जब सर्वप्रथम भारत में मार्कोपोलो आया। इससे पूर्व वहां डार्क एज था। यह बातें मुख्य वक्ता डॉ. शंकर शरण त्रिपाठी (से.नि.) इविंग क्रिश्चियन कॉलेज ने बुधवार को ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के गणित विभाग द्वारा अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत ‘भारतीय गणितज्ञों का योगदान: वैश्विक परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर कहा। उन्होंने भारतीय गणितज्ञों की तुलना यूरोपीय गणितज्ञों से किया तथा ईसा पूर्व से अब तक भारतीय गणितज्ञों द्वारा दिये गये सूत्रों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। जिससे महाविद्यालय के गणित विभाग के छात्र-छात्रायें विशेष रूप से लाभान्वित हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव ने किया। कहा कि देश की आजादी में महाविद्यालय संस्था के मनीषियों ने जो योगदान दिया वह अतुलनीय है।यह कार्य समाज को जोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ। कार्यक्रम का संचालन विभाग के संयोजक अभिषेक सिंह ने किया। इस अवसर पर विभाग में के.पी तिवारी, नीलकमल त्रिपाठी, विश्वजीत तिवारी, वरूण राज रावत एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।




