मौलूदे काबा हो गया शौहर बुतूल का-रिश्ता खुदा ने भेजा है बिन्ते रसूल का

प्रयागराज (अनुरागदर्शन समाचार )। पैग़म्बरे इसलाम हज़रत मोहम्मद ए मुस्तफा की बेटी फात्मा ज़हरा और पहले इमाम हज़रत अली के अक़्क (शादी) का जश्न जगहा जगहा मनाया गया।माहे ज़िलहिज्जा की पहली तारीख को दरियाबाद ,रानीमण्डी , करैली ,चक ज़ीरो रोड करैलाबाग़ ,दायरा शाह अजमल ,बख्शी बाज़ार ,शाहगंज सहित अनेको मोहल्लों मे अक़्दे मुश्किल कुशा व फात्मा ज़हरा पर जश्न का माहौल रहा।लज़ीज़ पकवान बनाए गए।दावतों व नज़्रो नियाज़ का दौर भी चलता रहा।कुछ जगहों पर केक भी काटा गया।खीर ज़रदा और दूसरे मीठे व्यंजन बना कर लोगों ने एक दूसरे घरों मे तक़सीम भी किए।वहीं शायराना महफिल मे पढ़ा अली के साथ है ज़हरा की शादी-सभी खुश हैं खोदा भी और खोदाई।अनवर बिलग्रामी ने पढ़ा सितारा अर्श से कहता है आकर-यह जोड़ी अर्श ए आज़म पर बनी है।रौनक़ सफीपुरी ने पढ़ा ज़ाहिद हैं हक़ परस्त हैं खुशखू हैं नेक हैं- दोनो खुदा के फ़ज़्ल से रुतबे मे एक हैं।वहीं अन्य शायरों में डॉ क़मर आब्दी ,नायाब बलयावी ,हसनैन मुस्तफाबादी ,इतरत नक़वी ,नजीब इलाहाबादी ,अमन दरियाबादी ,हाशिम बाँदवी ,रुसतम साबरी आदि ने भी एक बढ़ कर एक कलाम से महफिल को गुलज़ार बनाया।जश्न के मौक़े पर हसन नक़वी ,अली आला ज़ैदी ,सैय्यद मोहम्मद अस्करी ,शफक़त अब्बास पाशा ,शाहिद अब्बास रिज़वी ,ज़ामिन हसन ,औन जैदी ,जौन ज़ैदी आदि शामिल हुए।




