संत समागम

कलयुग में मानव कल्याण के लिये है श्रीमद्भागवत- आचार्य कौशल किशोर

गोंडा। ग्राम छतौरा (धमसडा) मे चल रही सप्त दिवसीय श्री मद्भागवद् कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस मे आचार्य कौशल किशोर जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य बताते हुए कहा की श्रीमद्भागवत एक ऐसी अमृतमयी कथा है, जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है।

वेद ग्रंथ कई लोगों से मानव जाति का कल्याण करते रहे हैं

उन्होंने कहा कि वेद ग्रंथ कई लोगों से मानव जाति का कल्याण करते रहे हैं, भागवत महापुराण यह उसी ज्ञान की पयस्विनी है, जो वेदों से प्रवाहित होती श्रीमद्भागवत अर्थात जो श्री युक्त है, श्री अर्थात चैतन्य, सौंदर्य, ऐश्वर्य “भगवतः प्रोक्तम इति भागवत” भाव भगवान कि वह वाणी, वह कथा है, जो हमारे जडवत जीवन में चैतन्यता का संचार कर, हमारे संपूर्ण पापों का नाश करती है, और हमारे मानव जीवन को सुंदर बनाती है। ऐसी श्रीमद्भागवत कथा केवल मृत्युलोक में ही प्राप्त करना संभव है, आचार्य जी ने भक्ति, ज्ञान, वैराग्य प्रसंग से भक्तों को भाव विभोर कर दिया, जिसे श्रवण कर सभी के हृदयों में प्रभु को प्राप्त करने की भावना प्रबल हो उठी।

सुख एक शाही धुंधकारी

श्रीमद् भागवत की कथा के माध्यम से हर प्राणियों में झुनझुनी जैसी बुद्धि भरी हुई है जो अंसारी सुख की छाया को लिए हुए अनेक अनेक प्रकार के अनर्गल कार्यों को और समाज में बहुजन सुखाय धुंधकारी की तरह अनेक प्रकार से लोगों को कष्ट देने के लिए जो बुद्धि उत्पन्न होती है। सुख एक शाही धुंधकारी है ऐसे धुंधकारी जन जन में व्याप्त है एक धुंधकारी के लिए गोकर्ण जी ने प्रयास किया और श्रीमद् भागवत की कथा सुनाने के बाद सातवें दिन उसका उद्धार हुआ। आज उस तरह धुंधकारी जो धुंधली जैसी बुद्धि में संसार की विवेक राज को लेकर के जन जन के मानस में धुंधकारी बैठा है। उन आत्माओं का कल्याण जब तक कांसे करण इंद्रिय से आत्मा में श्रीमद् भागवत की कथा नहीं पहुंचेगी तब तक जन जन के मानस से धुंधकारी का विनाश नहीं होगा।

मानव के लिये श्रीमद्भागवत की नितांत आवश्यकता है। योगी प्राणियों के लिए महाराज स्वामी शुकदेव जी ने  कहा है कि सदाचार और भगवान के प्रति ज्ञान और संसार से वैराग्य उत्पन्न होने के लिए श्रीमद् भागवत की कथा कलयुग लोगों के लिए अनिवार्य है।

कथा में आशीष निरमोही ने अपने सह कलाकारों के साथ रसमयी भजन से सभी भक्तों को मंत्र मुग्ध किया

इस अवसर पर, देशराज तिवारी, रामबुझारत तिवारी, रघुराज तिवारी, राजेश तिवारी, अमरेश तिवारी आदि सहित भारी संख्या मे श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।

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