इलाहाबाद समाचारसंत समागम

स्वामी संकर्षण महराज जी ने संगोष्ठी में कहा-हमेशा करें काबिल का ही चुनाव

प्रयागराज। मा कामाख्या संस्थान नैनी के स्वामी संकर्षण महराज ने कहा कि यह देश राम-कृष्ण और सनातन संस्कृति का है । इस देश मे सिर्फ और सिर्फ भगवा ही शोभायमान होता रहा है आगे भी भगवा ही शोभायमान होगा। यह बातें स्वामी संकर्षण महराज ने शुक्रवार को अल्लापुर स्थित एक गेस्ट हाउस में संगोष्ठी के दौरान कही। उन्होने कहा कि आज देश की राजनीति इतना अधिक विकृत अवस्था मे पहुँच चुकी है कि देशवासियों को हर मोड़ पर तोड़ने और आपस मे लड़ाने की कोशिश समाज विरोधी ताकतों के द्वारा किया जा रहा है। कहा कि कभी जाति-पांति ,कभी अगड़ा-पिछड़ा तो कभी हिन्दू और गैर-हिन्दू और इसका एक मात्र वजह है सत्ता पर स्थापित होना.।

बुद्धिजीवी वर्ग इस तुच्छ राजनीति को अच्छी तरह से समझ रहा है। इससे किसी का कोई लाभ नही होने वाला। स्वामी संकर्षण महराज ने कहा कि अभी समाज के प्रतिनिधि कानून बनाने की बात कहकर हिंदुत्व को एक करेंगे और भगवान  श्री राम के मन्दिर बनाने की घोषणा कुंभ पर्व तक होगी।

इससे भी कोई अंतर नही पड़ेगा।कई राज्यों के उप-मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री यह संकेत कर चुके हैं अब तक कि हम मंदिर बनाने की घोषणा करने वाले हैं और हिन्दुत्व का ताज अपने ऊपर लेने वाले हैं,और जनता हमे मानने पर मजबूर हो जायेगी।इससे भी कोई फर्क नही पड़ता।इस देश को राम-कृष्ण और शिव का मंदिर बन जाने या नही बनने से कुछ नही मिलने वाला।हमारी आस्था जैसे अनादि काल से है वैसी ही रहेगी।न तो बढ़ेगी और न ही घटनेवाली है।

स्वामी संकर्षण जी महराज ने कहा कि हाँ अगर देश को फर्क पड़ेगा तो हमारे देश के नेतृत्व से फर्क पड़ेगा कि हम अपने देश को किसे सौंप रहे हैं। जब कोई प्रतिनीधि योग्य नही रहेगा तो देश का विकास अवरुद्ध होगा।जो हमारे बीच का हो,जमीन से जुड़ा हो,सुलभ हो,सादगी जिसके जीवन मे हो,और समाज के लिये जीना चाहता हो ।ऐसा नेतृत्व कर्ता चाहे किसी भी दल का हो उसे चुनकर लोकतंत्र के पवित्र मंदिर में हम भेजें ,यही हमारा कर्तव्य और देश सेवा है। उन्होने कहा कि मंदिर-मस्जिद, जाति-पांति,अगड़े-पिछड़े,और दल-बदल और निर्दल के चक्कर में न पड़कर इस परिधि से बाहर निकलें और अपनी संस्कृति, अपनी सनातन देश और हिन्दुत्व की सात्विक विचारधारा को सम्भालें।

कहा कि जिसके दरवाजे पर जाकर गुहार लगाने की जरूरत न पड़े,बल्कि समाज और देश की आवश्यकता के अनुसार आपके दरवाजे पर स्वयं आकर आपका दर्शन करके गर्व की अनुभूति करे। स्वामी जी ने कहा कि ऐसा व्यक्ति चुनकर भेजो चाहे को किसी भी दल का हो , जाति या धर्म का हो।

किसी के स्वभाव और कर्म की निंदा करने की बजाय अपना उचित कर्तव्य निभाओ क्योंकि तुम्हीं भारत भाग्य विधाता हो। कहा कि एक बने,नेक बने। एक भारत-श्रेष्ठ भारत। इस दौरान अजय प्रताप सिह, विमल प्रकाश, अनुराग , शिव, केशव सहित अन्य लोगो ने भी विचार व्यक्त किया। संचालन विमल प्रकाश ने किया।

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