सिर्फ नाम का पोस्ट आफिस बनकर रह गया है सीडीए(पी) पोस्ट आफिस

पोस्ट आफिस में भारी अव्यवस्था का शिकार
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। कैंट पीसीडीए आफिस में वर्षों से स्थित पोस्ट आफिस वर्तमान में स्टाफ की कमी और मूलभूत सुविधाओं के चलते शो पीस बनकर रह गया है जिससे इस पोस्ट आफिस के खाताधारकों को काफी समस्याओें का सामना उठाना पड़ रहा है। कैंट थानांतर्गत द्रौपदीघाट के निकट पीसीडीए आफिस के अंदर स्थित है सीडीए (पी) के नाम से विख्यात पोस्ट आफिस इस पोस्ट आफिस में हजारों लोगों ने अपने पैसे जमा व निकासी करने के लिए अकाउंट खुलवा रखे हैं,मगर सिविल लाइंस के पास स्थित प्रधान डाकघर के भ्रष्ट अधिकारियों की उदासीनता के चलते वर्तमान में पान के गुमटी के जैसा बनकर रह गया है,कारण सीडीए पेंशन पोस्ट आफिस में स्टाफ न के बराबर है और यहां अक्सर नेटवर्क काम नहीं करता है,ये कोई नई बात नहीं बल्कि रोज का रोना है जिसका खामियाजा खाताधारकों को उठाना पड़ता है। उक्त पोस्ट में पैसा जमा करने में कोई दिक्कत नहीं होती लेकिन खाताधारक को जरूरत पड़ने पर खुद का पैसा निकालने के लिए नाकों चने चबाने पड़ते हैं, काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
जिसका जीता जागता उदाहरण हैं सदर बाजार निवासी राजेश सोनकर उन्होंने ने इसी साल के भ अप्रैल माह में सीडीए (पी) में अपना एकाउंट खुलवाया था,इस महीने ने अपने भतीजे के स्कूल की तीन महीने की फीस 12110 वाईएमसीए स्कूल में जमा करनी है, 7 जुलाई को वे पैसा निकालने गये लेकिन पैसा नहीं निकल सका पोस्ट आफिस में मौजूद एकमात्र स्टाफकर्मी ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण और लचर नेटवर्क व्यवस्था के चलते ऐसी दिक्कत पेश आ रही है अगर आपको पैसे की ज्यादा जरूरत है तो प्रधान डाकघर पासबुक लेकर चले जाइए वहां आसानी से पैसा निकल जाएगा,अभी दो तीन दिनों तक स्टाफ के अभाव में और खराब नेटवर्क खैर नेटवर्क का रोज का रोना है के चलते समस्या बनी रहेगी। राजेश सोनकर ने प्रधानडाकघर जाने से यह कर साफ इंकार कर दिया कि जब मेरा पैसा यहां जमा तो मैं इतनी दूर क्यों जाऊं। जवाब में तीन-चार दिनों के बाद आने को कहा गया क्योंकि बकरीद पर छुट्टी थी, खाताधारक दोबारा 12 जुलाई को 11000,हजार रुपया निकालने के लिए निकासी फार्म जमा किया तो जवाब मिला 3 बजे दोपहर में आइये अभी पैसा भी नहीं है और स्टाफ भी नहीं है नेटवर्क भी काम नहीं कर रहा है। स्टाफ के नाम पर फिर वही कर्मी और एक सफाईकर्मी था बाकी एक दो लोग और थे जो डाक छांटने और रजिस्ट्री व स्पीड पोस्ट से डाक बुक करने का काम करते हैं। लेकिन यहां गौरतलब कि जब इस पोस्ट आफिस में नेटवर्क काम ही नहीं करता है तो बाकी के सारे काम कैसे होते हैं,डाक,स्पीड पोस्टऔर रजिस्ट्री वगैरह किस सिस्टम के तहत की जाती है? ये अपने आप में एक ज्वलंत सवाल है। क्योंकि यहां आफीसियली और गैर आफीसियली रजिस्टर्ड डाक व स्पीड पोस्ट की भरमार रहती है,जो ताबड़तोड़ किया निबटाया जाता है। सिर्फ अपना पैसा निकालने वालों को वापस कर दिया जाता है जमा करने वालों को नहीं आखिर किस प्रणाली और नियम के तहत ऐसा किया जाता है। जब खाताधारक राजेश सोनकर ने इस ओर ध्यान दिया तो पाया कि इस पोस्ट आफिस मेंं एक सूत्रीय कार्यक्रम पर विशेष ध्यान दिया जाता है और वो डाक का काम खाताधारकों को सिर्फ रास्ता दिखाकर टरका दिया और परेशान किया जाता है।

