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झूंसी की दो जुड़वा बहनों ने लहराया मेधा का परचम

 

दोनों बहने पढ़ती है गर्ल्स हाई स्कूल में

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आइसीएसई बोर्ड दसवीं की परीक्षा में झूंसी में सराय तकी मोहल्ले में रहने वाली जुड़वा बहनों श्रेया पाठक और देशना पाठक ने बेहतरीन अंक लाकर परिवार और क्षेत्र का मान बढ़ाया है।श्रेया पाठक ने 97.2 प्रतिशत और देशना पाठक ने 96.50 प्रतिशत अंक प्राप्त किया है।दोनों बहने गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ती हैं । पिता शिक्षक और माता गृहणी हैं। खास बात यह है कि जुड़वा बहनों ने बिना किसी कोचिंग और ट्यूशन के यह उपलब्धि हासिल की है। श्रेया पाठक अभी से ही आइआइटी में चयन के लिए तैयारी में जुट गई है और बहन देशना पाठक डाक्टर बनना चाहती हैं। स्कूल में पढ़ाई के बाद यूट्यूब की मदद से पढ़ाई में निरंतर सुधार आया ।15 सदस्यों के संयुक्त परिवार में रहने वाली इन जुड़वा बहनों ने उपलब्धि का श्रेय अपने गुरुजनों और परिवार को दिया है।वही आइसीएसई (दसवीं) के नतीजों में सेंट जोसफ स्कूल के शुभ्रांग वसु ने 98.7 प्रतिशत अंक हासिल किया है। शुभ्रांग कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहते हैं। सिविल लाइंस निवासी शुभ्रांग के पिता डा. शक्ति बसु कन्नौज जिला चिकित्सालय में डाक्टर हैं और मां मोऊ बसु आर्यकन्या इंटर कालेज में शिक्षिका हैं। शुभ्रांग ने सफलता का श्रेय पिता और माता को देते हुए बताया कि उन्होंने बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी के जरिए सफलता हासिल की है।शुभ्रांग के भौतिक विज्ञान में 99, रसायन विज्ञान में 100, जीव विज्ञान में 100, गणित में 98, अंग्रेजी में 97 और सिविक्स में 99 नंबर मिले हैं। आइआइटी में दाखिले के लिए तैयारी शुरू कर चुके शुभ्रांग ने बताया कि वे सेल्फ स्टडी पर ही फोकस करेंगे। छात्राओं का कॉलेज सेंट मैरी कानवेंट स्कूल की छात्रा आस्था पांडेय ने आइसीएसई बोर्ड की परीक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किया है। अशोक नगर के पंचपुष्प अपार्टमेंट आस्था अब आगे की पढ़ाई कामर्स स्ट्रीम से करना चाहती हैं और उनका सपना चार्टड एकाउंटेंट बनना है। आस्था के पिता अनुज पांडेय एकाउंट प्रोफेशनल हैं और मां रचना पांडेय श्रीमहाप्रभु पब्लिक स्कूल में शिक्षिका हैं। आस्था को अंग्रेजी में 96, हिंदी में 96, सोशल स्टडीज में 100, विज्ञान में 98, गणित में 99 और कामर्शियल में 100 अंक मिले हैं।अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देते हुए आस्था पांडेय कहती हैं कि प्रतिदिन आठ घंटे तक पढ़ाई की। कठिन परिश्रम और समय प्रबंधन के अनुसार की गई पढ़ाई का फायदा मिला।

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