बौद्धिक क्षमता के विकास विषय पर कार्यशाला का आयोजन
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज पतंजलि समूह के द्वारा ”बौद्धिक क्षमता के विकास“ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम स्थल पतंजलि नर्सरी स्कूल का राधाकृष्णन सभागार था। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में आल इण्डिया चिन्मय युवा केन्द्र के स्वामी चिद्रुपानन्द जी ने अपने प्रभावी व्याख्यान द्वारा विषय पर गहन प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारम्भ श्लोकवाचन एवं दीप प्रज्ज्वलन द्वारा किया गया। तत्पश्चात पतंजलि समूह की सचिव डा० कृष्णा गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने कार्यशाला की भूमिका रखते हुए कोरोना आपदा के बाद सामान्य हुए जा जनजीवन के विषय में बताया एवं यह भी बताया कि वर्तमान जनजीवन नव सामान्य रूप से चल रहा हैए बिल्कुल पहले जैसा नहीं होता बल्कि कुछ परिवर्तन के साथ नव सामान्य रूप में स्थापित होता है। स्वामी चिदरुपानन्द जी ने अपने व्याख्यान में बताया कि मनुष्य को मुख्य रूप से बुद्धि का ही आश्रय लेना चाहिए बुद्धि ही हमें सही रूप से दिशा निर्देश दे सकती है। मनुष्य को प्रभावित करने वालों में उसके आसपास के व्यक्तिए उसका स्वयं का अनुभव एवं पूर्व जन्म के संस्कार होते हैं । इन सभी का आश्रय बुद्धि ही है। बौद्धिक क्षमता को बढ़ाना हमारे जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने ध्यान के द्वारा अपने मस्तिश्क को पवित्र करने की बात कही। उन्होंने व्हाट्सअपए फेसबुक आदि सोशल मीडिया से होने वाले बौद्धिक नुकसान के बारे में बताया। बुद्धि बहुत सारे न चाहने वाली बातों को भी मस्तिष्क में एकत्र कर लेती है। आत्ममंथन द्वारा हमें अच्छी बातों को मस्तिष्क मे रखना चाहिए एवं बुरी बातों को बाहर निकाल देना चाहिए। उन्होंने विचार को ऊर्जा के रूप में बताया, विचार जो हमें किसी भी कार्य के लिए प्रेरित करते हैं। एवं शरीर को क्रियान्वित करतें है। उन्होंने बुद्धि के स्तर के बदलाव को आवष्यक बताया। अन्तःकरण को विश्लेषित करते हुए स्वामी चिद्रुपानन्द जी ने अन्तःकरण के चार रूप बताए – मन बुद्धि चित्त, अहंकार स्वामी जी ने विदुर नीति के श्लोक की व्याख्या करते हुए पाँच बलों के बारे में बताया- बाहुबलए अमात्यबलए धन बल अभिजात बल एवं बुद्धिबल। इन सभी बलों में बुद्धिबल ही सर्वश्रेश्ठ है।
जिसके द्वारा सभी बलों को प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में प्रश्नोतर सत्र का आयोजन किया गयाए जिसमे जिज्ञासुयों के प्रश्नों का स्वामी ने समुचित उत्तर दिया। कार्यक्रम में पतंजलि समूह के सम्मानित सदस्य, सभी विद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाओं ने भाग लिया एवं महर्षि पतंजलि विद्यामंदिर की प्रधानाचार्या श्रीमती अल्पना डे गंगागुरुकुलम की प्रधानाचार्या श्रीमती माधुरी श्रीवास्तव ऋषिकुल विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री नित्यानन्द सिंह एवं पतंजलि नर्सरी स्कूल की संचालिका श्रीमती विभा श्रीवास्तव उपस्थित रहीं। धन्यवाद ज्ञापन श्री नित्यानन्द जी ने किया।


