किसानों को हठधर्मिता छोड़नी चाहिए: स्वामी नरेन्द्रानंद

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में जो हुआ वह देश का किसान कदापि नहीं कर सकता।
( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। देश के लिए चिंता का विषय बने किसान आंदोलन पर श्रीकाशी सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि किसान नेताओं को हठधर्मिता छोड़कर समाधान का रास्ता तलाशना चाहिए। टकराव किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने 26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसक घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि देश का किसान कभी भी कोई ऐसा कार्य नहीं कर सकता जिससे देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो या देश के सम्मान को ठेस पहुंचे। माघ मेला क्षेत्र स्थित अपने शिविर में प्रेस प्रतिनिधि से बात करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सरकार ने किसान नेताओं के समक्ष कृषि कानूनों को डेढ़ वर्ष तक निलंबित रखते हुए बातचीत का जो प्रस्ताव दिया है वह एक अच्छा प्रस्ताव है, किसान नेताओं को उसे मान लेना चाहिए। स्वामी नरेंद्रानंद ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए, यह उनका अधिकार है और सरकारों को भी कृषि को फायदे का सौदा बनाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। किसान समृद्ध होगा तो देश समृद्ध होगा। शंकराचार्य ने किसान नेताओं के अड़ियल रुख को गैरवाजिब बताते हुए कहा कि उनकी जिद देश के लोगों में उनकी नियत पर संदेह पैदा करता है। धरने पर बैठे किसान नेता जैसी बातें कर रहे हैं और जिस प्रकार कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं उससे ऐसा प्रतीत होता है की उन्हें किसानों से अधिक बिचौलियों की चिंता है। कानून बनाना सरकार का काम है और किसी भी कानून को रद्द करने के लिए सरकार को विवश करना कदापि उचित नहीं है।



