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Prayagraj Nikay Chunav Update: कम मतदान किसका बिगाड़ेगा काम, मतदान को लेकर उलझे राजनीतिक पंडित

Prayagraj Nikay Chunav Update: कम मतदान किसका बिगाड़ेगा काम, मतदान को लेकर उलझे राजनीतिक पंडित

प्रयागराज( अनुराग दर्शन समाचार )। नगर निकाय चुनाव में कम मतदान ने राजनीति के पंडितों को उलझा दिया है। मतदान के बाद इस बात का विश्लेषण शुरू हो गया है कि कम मतदान किसका काम बिगाड़ेगा।

इससे किसका फायदा होने जा रहा है। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों और उनके राजनैतिक दलों में भी कम मतदान को लेकर चिंतन शुरू हो गया है। इससे हर राजनैतिक दल सकते में है। सभी को हार का भय सताने लगा है। क्षेत्रवार मतदान पर मंथन चल रहा है। किस क्षेत्र में किस दल का वोट कम या अधिक है और वहां मतदान का प्रतिशत क्या है इसका विश्लेषण कर फायदा और नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।

शहर क्षेत्र के तुलना में मतदान का प्रतिशत उन जगहों पर अधिक रहा है जो नगर निगम में नए जुड़े हैं। वैसे तो हर राजनैतिक दल कम मतदान को अपने हित में बता रहा है लेकिन हकीकत कुछ और ही समझ में आ रही है। पूरा चुनाव भाजपा और सपा के बीच लड़ा जाता दिखा। यदि ऐसा ही हुआ तो चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा यह कह पाना कठिन है। हार-जीत का अंतर भी कम हो सकता है। राजनैतिक पंडितों के मुताबिक कम मतदान सत्ता के खिलाफ भी हो सकता है और सत्ता के पक्ष में।

सुबह से हो गयी शाम, न पर्ची मिली न नाम

मतदान कम होने के कई कारण रहे। इसमें सबसे बड़ा रोल प्रशासन का दिखा। बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब रहे। लोग वोट डालने के लिए मतदान केन्द्र पर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि सूची में उनका नाम ही नहीं है। घंटों परेशान होने के बाद भी कोई समाधान न निकलने पर लोग प्रशासन को कोसते हुए घर लौट गए।

आलम यह रहा कि जिन परिवारों ने बीते लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदान किया था उन परिवारों के ही आधे से अधिक सदस्यों का नाम मतदाता सूची से गायब रहे। मतदान के लिए लोगों को जागरुक करने और मतदान स्थल तक जाने के लिए प्रेरित करने में भी प्रशासन असफल रहा। न चुनाव के दिन और न इसके पहले प्रशासन का कोई भी अधिकारी इसे लेकर काम करता दिखा। पहले की भांति इस बार मतदाता पर्ची भी लोगों के घरों तक नहीं पहुंची जबकि यह कार्य बीएलओ द्वारा किया जाना था।

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