कटरा रामलीला कमेटी में हुआ सीता हरण का मंचन, रामलीला के पूर्व भगवान का हुआ पूजन
रामलीला के पूर्व भगवान का हुआ पूजन

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )।कटरा रामलीला कमेटी में हुआ सीता हरण का मंचन, रामलीला के पूर्व भगवान का हुआ पूजन श्री कटरा राम लीला कमेटी प्रयागराज के तत्वावधान में राम वाटिका प्रांगण में चल रहे रामलीला मंचन के अष्टम दिवस दिन शनिवार को हो रहे रामलीला मंचन के आगे के प्रसंग में शूर्पनखा द्वारा अपने भाइयों को युद्ध के लिए कहना, रावण द्वारा सीता का हरण, सबरी द्वारा श्री राम जो को बेर का भोग, राम-हनुमान मिलन इत्यादि का मंचन हुआ।
रामलीला मंचन के पूर्व मुख्य अतिथि संजीव अग्रवाल, ओम प्रकाश अग्रवाल, प्रमोद बंसल, शिव कुमार वैश्य, विजय गुप्ता, भानु प्रकाश अग्रवाल, शिव शंकर सिंह, शुशील खरबंदा , आशीष अरोरा, आशीष केशरवानी एवं कमेटी के अध्यक्ष सुधीर कुमार गुप्ता (कुक्कू), उपाध्यक्ष आनन्द अग्रवाल, महामंत्री उमेश चन्द्र केशरवानी कोषाध्यक्ष अश्वनी केशरवानी, शिवबाबू गुप्ता ने राम चरित मानस की आरती कर मंचन का प्रारम्भ हुआ।
इस अवसर पर विपुल मित्तल, मयंक अग्रवाल मंत्री, महेश गुप्ता, दिलीप चौरसिया, मीडिया प्रभारी पवन प्रजापति आदि सदस्य गण उपस्थित रहेl वहीं मीडिया प्रभारी पवन प्रजापति के अनुसार सुबोध सिंह के निर्देशन में हो रहे रामलीला मंचन के आगे के प्रसंग शूर्पनखा अपने राक्षस भाइयों खर और दूषण के पास जाकर राम और लक्ष्मण से युद्ध करने के लिए उकसाया और कहा कि मेरे इस अपमान का बदला लो। तब खर और दूषण ने राम और लक्ष्मण पर हमला किया, परन्तु दोनों ही राम और लक्ष्मण द्वारा मारे गये। खर और दूषण की मृत्यु के बाद शूर्पनखा और भी ज्यादा अपमानित महसूस करने लगी और पहले से भी ज्यादा क्रोध से भर गयी। इस कारण वो राक्षसों के राजा और अपने बड़े भाई लंकापति रावण के पास गयी और रावण-रावण कहकर इस प्रकार कराहती और चीखती हुई, अपनी कथा सुनाई। साथ ही साथ सीता की सुन्दरता का भी बखान किया और रावण को अपने अपमान का बदला लेने के लिए युद्ध करने के लिए उकसाया। संध्या का समय हो रहा था। प्रभु श्री राम उस सुनहरे हिरण का पीछा करते हुए घने जंगल में जा पहुँचे थे और जब उन्हें लगा कि अब हिरण को पकड़ा जा सकता हैं, तो उन्होंने अपने धनुष सेंय हिरण को निशाना बनाकर तीर छोड़ा। जैसे ही तीर मारीच को लगा, वह अपने वास्तविक रूप में आ गया और रावण की योजनानुसार भगवान राम की आवाज में दर्द से चीखने लगा लक्ष्मण, बचाओ लक्ष्मण…. सीता, सीता। इस कराहती हुई आवाज को सुनकर सीताजी ने लक्ष्मणजी तो भेजा। परन्तु लक्ष्मणजी अपने भैया राम के द्वारा दिए गये सीता माता की रक्षा करने के आदेश को पूर्ण करने के लिए उन्होंने एक उपाय सोचा और उस उपाय के अनुसार उन्होंने कुटिया के चारों ओर एक रेखा खींच दी, जिसके भीतर कोई नहीं आ सकता था।




