
प्रयागराज। सरकार आजाद जी के देश प्रेम और उनके बलिदान का इस्तेमाल करके सिर्फ अपने काम की रोटियां ही सेक रही है। अगर सच में सरकार के अंदर आजाद जी के प्रति सच में सम्मान होता तो आज उनके दाह स्थल पर आजाद की प्रतिमा तो लगी ही होती और भारतीयों का सर आज गर्व से ऊंचा होता।
यह सरकार सत्ता के मद में चूर है। इसे सिर्फ वाह वाही बटोरने में दिलचस्पी है जबकि ऐसा प्रतीत होता है कि युवाओं को लुभाने के लिए अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद जी के नाम को तो इस्तेमाल कर ले रही है ।
किंतु उनके दाह स्थल रसूलाबाद घाट पर आज झाड़ू तक नहीं लग पाती। इस संदर्भ में सभी राज नेताओं ,पाधिकारियों एवँ प्रशासनिक अधिकारियों से पत्राचार एवं मुलाकात के उपरांत भी यह प्रकरण अधर में ही लटका है। देशप्रेमी आजाद के बलिदान को याद करते हुए, लोगों ने कहा कि आज़ाद जी के वास्तविक सम्मान के लिए उनके ऊपर वोट बैंक के लिए पुष्प चढ़ाने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि उनको आने वाली पीढ़ी किस प्रकार याद रखे ! यही एक वीर एवं स्वतंत्रता सेनानी के उचित सम्मान की रक्षा है।



