अनुराग हुए किन्नर अखाड़े में शामिल, बने सतपुत्र, महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा-धर्म की राह पर “पुनीत अनुराग”

प्रयागराज। किन्नर अखाडे ने अपना विस्तार देश और विदेश में प्रयाग कुंभ से करने जा रहा है। अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महराज और किन्नर अखाडा के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी जी महराज ने अनुराग शुक्ला को पगडी पहनाकर अखाडे का सतपुत्र घोषित किया।

किन्नर अखाडे के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी महराज अलोपीबाग निवासी और लंबे समय से किन्नर अखाडे से जुडे अनुराग शुक्ला को कुंभ मेले के दौरान महामण्डलेश्वर बनाना चाहती थी लेकिन जगदगुरू स्वामी वासुदेवनंद सरस्वती महराज ने कहा कि महामण्डलेश्वर से बेहतर और उत्तम है कि अनुराग को सतपुत्र बनाया जाये क्योकि यह पद भी अपने आप में उत्तम है।

जगदगुरू और किन्नर अखाडा प्रमुख ने अनुराग को पगडी बांधकर विधि विधान से अखाडे का सतपुत्र बनाया। किन्नर अखाडा प्रमुख ने कहा कि किन्नर अखाडे का प्रयाग कुंभ में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिये विस्तार होगा क्योकि 13 अखाडे धर्म और परंपरा भूलकर आधुनिकता में जी रहे है।
यह लोग सनातन धर्म को भूल गये है। कहा कि जिन क्षेत्रो में और विदेश में किन्नर अखाडे का गठन नही हुआ है वहा के लिये पदाधिकारी बनाये जायेगे और उनके मठ – मंदिर, गौशाला, वृद्धाश्रम और विधवाश्रम भी होगे। अखाडा प्रमुख ने कहा कि छह जनवरी को धूमधाम से देवत्व यात्रा (पेशवाई)काल्विन अस्पताल के पास से निकलेगी।



