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सनातन धर्म, संस्कृति एवम् परम्परा के सम्वर्धन एवम् संरक्षण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें-शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती

स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी का जगद्गुरु पद पर पट्टाभिषेक किया गया

(अनुराग शुक्ला)प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य एवम् अन्य पूज्य सन्तों की उपस्थिति में श्री यतीन्द्र वेदान्त देशिक सत्संग सेवा संस्थान के शिविर में आयोजित जगद्गुरु पद पट्टाभिषेक कार्यक्रम में स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी का जगद्गुरु पद पर पट्टाभिषेक किया गया |
इस अवसर पर पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने अपना आशिर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी सनातन धर्म, संस्कृति एवम् परम्परा के सम्वर्धन एवम् संरक्षण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे । पूर्व में भी जगद्गुरुओं एवम् आचार्यों ने अपने ज्ञान एवम् उपासना से तथा देश भर में अपनी यात्राओं के माध्यम से सनातन धर्मावलम्बियों में चेतना का संचार कर समाज में एकरूपता का निर्माण किया है । आज भी इसी मार्ग पर चलने की आवश्यकता है, जिससे सनातन संस्कृति एवम् सभ्यता अक्षुण्ण रहे, गायों का संरक्षण/सम्बर्धन होता रहे, जिससे विखण्डित एवम् विभाजित समाज को एकसूत्र में पिरोकर आध्यात्मिक/राजनैतिक परिवर्तन का सूत्रपात होगा । पूर्व में सनातन संस्कृति, परम्परा को अपमानित किया जाता था, लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा मठों-मन्दिरों में जाकर २-३ घण्टे पूजा आराधना करने से सनातन धर्म के प्रति सम्पूर्ण विश्व का दृष्टिकोण काफी कुछ बदला है, और इस बदलाव की निरन्तरता बनी रहे, इसके लिए सभी धर्माचार्यों का कर्तब्य एवम् दायित्व है कि अपने पंत प्रधान को हताश, निराश व कमजोर न होने दें। ताकि सनातन धर्म की पताका विश्व में फहराती रहे, और सनातन धर्म के द्रोहियों का उन्मूलन होता रहे ।
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि पूर्व की सरकारों के समय पाकिस्तान ने संसद पर हमला कराया, मुम्बई में हमला कराया, इसके अलावा अनगिनत हमले कराये, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने अपनी कमजोरी का ही परिचय दिया, लेकिन वर्तमान सरकार ने पाकिस्तान को उसके किये की सजा उसके घर में घुसकर आतंकी शिविरों को नष्ट कर उसमें पल रहे आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को यमराज की सेवा में भेजकर दिया । इतना ही नहीं चीन को भी डोकलाम से पीछे हटने पर विवश भी इसी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण सम्भव हुआ है ।

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