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रामनवमी से हनुमान जयंती के बीच शुरू हो भव्य राम मंदिर निर्माण- संत समागम में विहिप ने जताई इच्छा

प्रयागराज। आज माघ मेला विश्व हिंदू परिषद शिविर में आयोजित संत सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत दीप प्रज्वलन कर अखाडा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने किया ।

अध्यक्षता मणिराम दास छावनी परिषद राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी ने किया प्रस्तावना विहिप के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने रखा सी.ए.ए के समर्थन में कहा यह कानून धर्म से सताए जैन, बौद्ध, सिख, हिंदू जो शरणार्थी हैं उन्हें नागरिकता मिल रही है कल केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में संतो ने इसके लिए गांव-गांव जाकर संतो के नेतृत्व में इसका जागरण करेंगे।

विहिप कार्यकर्ता जाकर शरणार्थियों से फार्म भरवाएंगे स्टेट ऑफिसर, केंद्रीय ऑफिसर से मिलकर जमा करेंगे, राम जन्म भूमि के विषय में जिन पूज्य संतों ने 1984 से इस आंदोलन को नेतृत्व दीया उन्ही के मार्गदर्शन में हो जो इस मंच पर उपस्थित है जो मॉडल 30 वर्ष से पूज्य संतों ने तय किया जो प्रयागराज कुंभ 1989 में रखा गया जिस का 60 प्रतिशत पत्थर तराश कर तैयार है उसी मॉडल पर बने ।

निर्माण तिथि भी इसी चैत्र वर्ष प्रतिपदा रामनवमी 25 मार्च से 8 अप्रैल हनुमान जयंती तक कार्य शुरू हो ऐसी संतों की इच्छा है।

जनसंख्या का असंतुलन पर कल केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल में एक देश एक विधान हो जिससे पूरी दुनिया का एकमात्र अध्यात्मिक हिंदू राष्ट्र की पहचान कायम रहेगी, आज सामाजिक समरसता के सौहार्द को बिगाड़ कर,जो हिंदू अनेक भाषा मत, पंथ, संप्रदाय की एकता को जोड़ने का कार्य करता है वह हिंदू धर्म है उसको जातियों में तोड़कर दलित मुस्लिम समाज की एकता का नारा देकर हिंदू समाज को तोड़ने का कार्य धर्मांतरण करने की साजिश है।

इसे रोकने के लिए विहिप जागरण सेवा, सुरक्षा, संस्कार देकर हम अपने धर्म की रक्षा करेंगे, राम जन्मभूमि न्यास का प्रत्यावेदन केंद्र सरकार को पूर्व में उसके रिकॉर्ड एवं 22 बिंदुओं के सहित जानकारी दी जा चुकी है, पूरा पैसा,पत्थर एकत्र कर ट्रस्ट को दे देंगे, संतों ने वामदेव जी, रामानुजाचार्य, अवैद्यनाथ जी, परमहंस दास जी, अशोक सिंघल जी, देवराहा बाबा को सच्ची श्रद्धांजलि एवं बलिदान 4 लाख हिंदू वीरो जिनकी आत्मा आज भी जीवित है, ।

जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी ने कहा कि अगर राम जन्मभूमि न्यास को एवं आंदोलन में हिस्सा लेने वाले संतो को भव्य मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी न मिली तो मैं आज यह घोषणा करता हूं की मै कभी अयोध्या नहीं जाऊंगा न सरयू स्नान करूंगा, अनेक संतों ने इन विषयों पर अपने-अपने विचार रखें, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र गिरी जी ने समस्त अखाड़ाओं की तरफ से विहिप प्रस्तावों का समर्थन किया अंत में अध्यक्षता कर रहे राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी ने इसे सफल संत सम्मेलन और आए हुए सभी संतो को धन्यवाद दिया,।

प्रमुख संतों में महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद जी, हरिहरानंद जी, विवेकानंद जी, ब्रह्मानंद आश्रय, योगीराज दिव्यानंद, श्याम दास जी, विश्वेश प्रपन्नाचार्य, घनश्यामाचार्य जी, डॉ .लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी, जितेंद्रनंद जी, मौनी बाबा, मदन गोपाल दास जी विहिप से प्रमुख रूप से केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे, विनायकराव देशपांडे, दिनेश, पंकज, संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी, अम्बरीश सिंह, मुकेश कुमार, अभिषेक पाठक, गौरव जायसवाल सम्मेलन का संचालन केंद्रीय उपाध्यक्ष जीवेश्वर मिश्र ने किया!

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