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भारत के लिए गौरव और आत्मनिर्भरता के 22 वर्ष पूर्ण होने का दिन-शशांक शेखर

प्रयागराज (अनुराग शुक्ला ) । आज पोखरण परमाणु परीक्षण दिवस भारत के लिए गौरव और आत्मनिर्भरता के 22 वर्ष पूर्ण होने का दिन है उक्त उद्गार आर्ट आफ योग के संस्थापक शशांक शेखर पाण्डेय ने व्यक्त किया।


उन्होंने कहा कि पोखरण परीक्षण के बीच, अमेरिका और कई अन्य यूरोपीय देशों ने परीक्षण के कारण भारत के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगा दिए किंतु तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी जी इसके लिए तैयार थे।उन्होंने कहा था “मुझे भरोसा है कि देशवासी परमाणु परीक्षण के कारण देश के सामने आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने में समर्थ हैं।


अर्थव्यवस्था बुनियादी रूप से मजबूत स्थिति में है और मेरा मानना है कि जब बात देश की सुरक्षा की हो तो हमारे लोग कोई भी बलिदान करने को तैयार रहते हैं.”


उनका आकलन सही था. वर्ष 2000 में सुलह के संकेत देते हुए अमेरिका ने भारत पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया और राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत के पहले दौरे पर आए—दो दशकों में ऐसा करने वाले वे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे.
परमाणु परीक्षणों को लेकर वाजपेयी जी की स्पष्टता, दृढ़ विश्वास और साहस के कारण देश के परमाणु इतिहास में उनका नाम अमर रहेगा. 2005 में उनके उत्तराधिकारी डॉ. मनमोहन सिंह के भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर के बाद भारत के खिलाफ लगा परमाणु भेदभाव पूरी तरह खत्म हो गया. तब वाजपेयी जी ने कहा था कि “मेरे लिए उस पल की व्याख्या करना मुश्किल है, पर मुझे संतुष्टि और खुशी का अनुभव हुआ.’


शशांक ने कहा कि भारत के गौरव और आत्मनिर्भरता का यह सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

शशांक ने कहा कि आज वैश्विक महामारी कोरोना के बचाव के लिए भारत की प्राचीन परम्पराओं का अनुसरण लगभग पूरा विश्व कर रहा है यह भी भारत के लिए गौरव का विषय है।

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