हज़रत अली की शहादत पर तीन दिवसीय शोक पर सामुहिक आयोजन व जुलूस पर ओलमाओं ने दी हिदायत
प्रयागराज ( अनुराग शुक्ला )। माहे रमज़ान की 19वीं (13 मई बुधवार)से 21वीं (15 मई शुक्रवार)तक हज़रत अली की शहादत पर ग़म मनाने का सभी मातमी कार्यक्रम इस बार घर तक ही सीमित रहेगा।न तो ताबूत सजेगा और न ही सड़कों पर जुलूस निकाले जाएंगे।

अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी ने प्रेस को जारी विज्ञप्ती के माध्यम से बताया की कोरोना वॉयरस और लॉकडाउन के कारण प्रशासन के दिशानिर्देशों का शतप्रतिशत पालन करते हुए जहाँ माहे रमज़ान की इबादतों और बाजमात नमाज़ नहीं हो रही है वहीं किसी प्रकार के धार्मिक आयोजन जहाँ शोशल डिस्टेन्स का खयाल रखना महत्वपूर्ण और विश्वव्यापी महामारी से लोगों को बचाना अहम है ऐसे में तमाम ओलमाओं ने पहले ही ताकीद कर दी है की हम न तो सामूहिक नमाज़ अदा करेंगे बल्कि घरों में रहकर ही इबादत करेंगे।
इसी तरहा दामादे रसूल हज़रत अली की शहादत के मौक़े पर पूर्व वर्षों में होने वाली मजलिस मातमी जुलूस नहीं निकाले जाएंगे।अस्करी ने बताया की मस्जिद क़ाज़ी साहब बख्शी बाज़ार में हज़रत अली की शहादत पर तीन दिवसीय मजलिस इस साल नहीं होगी।
21 रमज़ान को प्राताः फजिर की नमाज़ के बाद मस्जिद क़ाज़ी साहब से सभी लाईटों को बुझा कर मोमबत्ती की रौशनी में निकलने वाला ऐतीहासिक ताबूत जुलूस भी नहीं निकलेगा और न ही ताबूत को सजाया जाएगा।उन्नीस रमज़ान को करैली मसूद साहब के आवास से, रानीमण्डी धोबी गली में मिर्ज़ा काज़ीम अली से दरियाबाद मस्जिद इमाम रज़ा से जुलूस इस बार नहीं उठाया जाएगा।
माहे रमज़ान की 20 तारीख को फजिर की नमाज़ के बाद दरियाबाद मस्जिद गदा खाँ से अन्जुमन नकविया द्वारा ,रानीमण्डी कोठी नवाब नन्हे से असग़र अब्बास की क़यादत में निकलने वाला मातमी जुलूस भी नहीं निकलेगा।
अरब अली खाँ से अन्जुमन हाशिमया की क़यादत में निकलने वाला जुलूस भी नहीं निकाला जाएगा।21 रमज़ान यौमे शहादत हज़रत अली पर रानी मण्डी इमामबाड़ा आज़म अली से और इमामबाड़ा आबिदया से उठने वाला जुलूस भी इस वर्ष नहीं निकाला जाएगा।
वहीं दरियाबाद से माहे रमज़ान की 21 वीं को इमामबाड़ा अरब अली खाँ से प्राताः 10 बजे तजल्ली बेगम से दिन में 12 बजे और इमामबाड़ा मोजिज़नूमा से रात्रि 9 बजे उठने वाले जुलूस भी नहीं उठेंगे।
दरियाबाद,करैली,रानीमण्डी,बख्शी बाज़ार की दो दर्जन मातमी अन्जुमनों ने शासन के दिशानिर्देशों का पूर्णत्या पालन करते हुए सभी से अपील की है की वह अपने अपने घरों में रह कर काले लिबास धारण कर शोक मनाएँ घरों से या अली मौला हैदर मौला की सदा बुलन्द करें।
मौलाए कायनात अमीरुल मोमेनीन की शहादत का पुरसा दें और बारगाहे इलाही से दुआ करें की इस महामारी और नागहानी वबा से हम सब को महफूज़ रखे।और हमारा मुल्क व दुनिया को इस वबा से निजात मिले।




