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SUCI(C) ने किया मजदूर नेताओं पर FIR दर्ज करने की निन्दा

प्रयागराज। सोशलिस्ट यूनिटी सेन्टर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) की प्रयागराज जिला समिति ने उपश्रमायुक्त कार्यालय में श्रमिक संगठनों के अखिल भारतीय विरोध के आह्वान के क्रम में प्रयागराज उपश्रमायुक्त के ऑफिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापन के कार्यक्रम पर ट्रेड यूनियन नेताओं पर एफआईआर दर्ज करने की भर्त्सना करते हुए इसे सरकार के निर्देशों पर मजदूरों की बात करनेवालों को डराने की कार्यवाही बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की।

SUCI(C) की ओर से जारी बयान में उत्तर प्रदेश सरकार के छः माह तक कर्मचारियों के हड़ताल करने पर रोक लगाने को अलोकतांत्रिक बताते हुए इस तुगलकी फरमान को तुरंत वापस लेने की मांग की। जिला सचिव राजवेन्द्र सिंह ने कहा कि एक तरफ कर्मचारियों के भत्ते सुविधाओं में अवैध रूप से कटौती की जा रही है तो दूसरी ओर प्राप्त जनतांत्रिक अधिकारों को भी खत्म करके मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से लोकतंत्र और संविधान का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि 22 मई का प्रदर्शन पूर्णतः शान्तिपूर्ण था और उप श्रमायुक्त के आफिस में लोग मास्क लगाकर शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिये इकट्ठा हुए थे जिसमें किसी कानून का कोई उल्लघन नही हुआ।

पब्लिक के लिए खुले आफिस के अंदर धारा 144 को तोड़ने का आरोप निराधार है क्योंकि पब्लिक आफिस में धारा 144 द.प्र. स. लागू नही होती इसलिए धारा 188 के अतर्गत कोई मामला नही बनता इसी प्रकार धारा 269 और 270 के अंतर्गत भी कोई मामला नही बनता क्योंकि इन धारों के अंतर्गत विद्वेषपूर्ण आशय से संक्रामक बीमारी फैलाने को प्रतिषिद्ध किया गया है ।

जबकि श्रमिक नेताओं के द्वारा ऐसा कोई कृत्य नही किया गया। सरकार प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित वापसी में बुरी तरह नाकाम रही है इसलिए वह कोरोना और एफ़ आई आर के नाम पर लोगों के अंदर भय पैदा करके राज करना चाहती है, लेकिन इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़े तानाशाह की जनता का मुंह बंद करने की कोशिश कभी सफल नही हुई है और बीजेपी सरकार की भी ये कोशिशें नाकाम होंगी और देश की न्यायप्रिय मेहनतकश जनता सरकार की हर तानाशाही का जवाब सर् ऊंचा करके प्रतिरोध की आवाज को बुलंद करके करेगी।

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