Latest

कबीर एक बैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले निर्भीक दार्शनिक और समाज सुधारक थे

प्रायागराज । सन्त कबीर कवि से पहले एक समाज सुधारक थे। उन्होने समाज में व्याप्त रूढ़ियों तथा अन्धविश्वासों पर करारा व्यंग्य किया है। उन्होने धर्म का सम्बन्ध सत्य से जोड़कर समाज में व्याप्त रूढ़िवादी परम्परा का खण्डन किया है।

कबीर साहब एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले निर्भीक दार्शनिक और समाज सुधारक थे। कबीर ने मानव जाति को समानता का सन्देश दिया है।

कबीर ने गलत को गलत और सही को सही बिना लाग लपेट सीधा-सीधा कहते थे उक्त बातें डा. अम्बेडकर वेलफेयर एसोसिएशन (दावा) और प्रबुद्ध फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में सन्त कबीर की ऑनलाइन मनायी गयी जयन्ती के आयोजक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने कही।


रामबृज ने आगे बताया कि कबीर ने सभी धर्मों की अवैज्ञानिक अतार्किक और काल्पनिक सोच को एक सिरे से खारिज किया है। जाति धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर इंसान को प्रेम और सदभावना के साथ मानवता के प्रति प्रेरित किया है।

डॉ बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर जैसे महान विद्वान ने भगवान बुद्ध और ज्योतिबा फुले की तरह सन्त कबीर को अपना तीसरा गुरु माना है।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय विवि गोरखपुर से शोध कर चुके डा. आरपी गौतम ने कबीर की कुछ वाणियों को सुनाते हुये बताया कि एकै त्वचा, हाड़, मल, मूत्रा, एक रुधिर एक गुदा।एक बूंद से सृष्टि रची है, को ब्राह्मण को शुद्रा !। पत्ता बोला वृक्ष से, सुनो वृक्ष बनराय !

अब के बिछड़े न मिले, दूर पड़ेंगे जाय !! धार्मिक पाखण्ड पर कबीर ने गहरी चोट करते हुये अपनी वाणी द्वारा कहा कि कांकर-पाथर जोरि के, मस्जिद ली बनाई। ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहिरा हुआ खुदाय ।।? पाहन पूजि हरि मिलै, तो में पूजूं पहार ! घर की चाकी क्यों नाहिं पूजैं, जाको पीसो खाय।। ? दिन भर रोजा रहत है, रात हनत दे गाय ! यह तो खून व बन्दगी, कैसे खुशी खुदाय ।

दाढ़ी मूंछ मुराय कै, हुआ घोटम घोट ! मन को क्यों नहीं मुरिये, जामै भरिया खोट !! कबीर ने सामाजिक विषमता पर एक विद्रोह की तरह प्रहार करते हुये अपनी वाणी में कहा कि जो तू तुर्क, तुर्कनी जाया। अंदर खतना, क्यों ना कराया।। ? जो बामन तू, बमनी जाया। आन बाट, काहे नही आया।। ? कबीर कुआ एक है, पानी भरें अनेक। बर्तन में ही भेद है, पानी सब में एक।। तुम कत बामन, हम कत शूद। हम कत लोहू, तुम कत दूध।। मानव प्रेम पर कबीर ने अपनी वाणी के माध्यम से बताया कि सुखिया सब संसार, खावे और सोवे। दुखिया दास कबीर, जागे अरु रोवे।। कबीरा खड़ा बजार में, लिए लकुटिया साथ। जो घर फूंके आपणो, चले हमारे साथ ।।जब हम आये, जग हंसा हम रोये।
करनी ऐसी कर चलें, हम हंसे जग रोये।।
उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता शुकदेव राम ने बताया कि कबीर के जीवन दर्शन और मानवता के प्रति उनके योगदान को शब्दों में बांधना असम्भव है फिर भी कबीर सत्य के करीब थे। कबीर का निर्गुण रूप बेबाक और निडर था। कबीर एक दहकता हुआ अंगारा थे। जिसने सभी धर्मों की पाखंडी दुनिया को हिला कर रख दिया। जब तक दुनिया में अवैज्ञानिक धारणाएं रहेंगी कबीर हमेशा प्रषांगिक बनकर मानवता को प्रेरित करते रहेगे।
कबीर के आनलाइन जयन्ती समारोह में डिप्टी एसपी बहादुर राम, बीआर दोहरे, कुन्ज बिहारी, मोतीलाल अहिरवार, बलवन्त गौतम, कुमार सिद्धार्थ, जीडी गौतम, इंजी. आरआर गौतम,इंजी.माताप्रसाद, इंजी.जेपी मणि, डा. एसपी सिद्धार्थ आदि आनलाइन उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button