जनहित में पेट्रोलियम उत्पाद भी जीएसटी के दायरे में हो- रेवती रमण

प्रयागराज । राज्यसभा सांसद कुवंर रेवती रमण सिंह ने लगातार रोज बढ़ रहे पेट्रोल – डीजल के दामों में वृद्धि पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि विश्व में विकसित व विकासशील देशों में भारत में ही पेट्रोलियम उत्पादों पर सबसे ज्यादा टैक्स हैं जिसकी वजह से इसके दाम भी सबसे ज्यादा है केंद्र व प्रदेश की सरकारें सिर्फ अपने खजाने का ध्यान रखती हैं उनको जनता की तकलीफों से कोई वास्ता नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस कोरोना महामारी में जब आमजनता के कामकाज में लाकडाउन लगा हैं लोगों के रोजगार छीन गए लाखों फैक्ट्रियों में ताले जड़ गए हो बाजार सुनें हो ग्राहक घर से बाहर सिर्फ आवश्यक वस्तुओं के लिए ही निकल रहा हो तो सरकार को अपने खजाने भरने की जगह उनको सहूलियत देने वाले काम करने चाहिए पर सरकार तो यहाँ हर तरह से जेब काटने में लगीं हैं।
उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल मे लगातार गिरावट के बाद भी भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी सोचनीय हैं।भारत में डीजल लगभग 18₹ प्रति लीटर और पेट्रोल लगभग 17₹ प्रति लीटर बेस प्राइस रहतीं जिसपर एक्साइज ड्यूटी- सेस आदि मिला कर और 69% टैक्स के साथ आज विश्व में सबसे ज्यादा पेट्रोल- डीजल भारत में ही महंगा हैं जिसकी वजह से हर वस्तुओं के लागत में वृद्धि होती हैं और महंगाई से आमजनता का जीना दूभर हो गया इसलिए मैं केंद्र सरकार से मांग करता हूँ कि जनहित में पेट्रोलियम उत्पादों को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाय जिससे मंहगाई पर कंट्रोल हो और आम जनता राहत की सांस ले सके।
पूर्व सपा प्रदेश प्रवक्ता विनय कुशवाहा ने यह बताते हुए कहा कि जैसे अन्य राज्यों ने इस कोरोना महामारी में जनता को राहत देने के लिए बिजली के बिल में कटौती की है उसी तरह उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी 200यूनिट प्रति माह बिजली का बिल कोरोना संक्रमण काल का माफ करें।उन्होंने कहा कि 6 माह का हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, सीवर टैक्स माफ कर परेशान मध्य वर्ग को राहत दे क्योंकि अभी तक मध्य वर्ग के लिए कोई भी धोषणा नहीं हुआ इसलिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार परेशान शहरवासियों को भी कुछ मदद दे, सिर्फ जुबानी खर्च से अब काम नहीं चलेगा।



