आस्था और विश्वास की नगरी विंध्यवासिनी धाम में महामंत्र की गूंज
विंध्याचल (अनुराग दर्शन समाचार ) सुमित पांडे । कोरोनावायरस महामारी के कारण उत्तर भारत का तीर्थ स्थल मां विंध्यवासिनी धाम का कपाट बंद है।
1973 74 में भारत में एक महामारी आई थी बड़ी माता चेचक। इससे विंध्याचल भी अछूता नहीं था। उक्त महामारी में विंध्याचल से हर दिन आधा दर्जन से अधिक मौत उक्त महामारी से हो रही थी। देश के साथ साथ उस समय विंध्याचल में मायूसी सन्नाटा पसरा था।
लेकिन मां का पूजा पाठ यहां का समाज निरंतर कर रहा था! कीर्तन के रूप में एक महामंत्र सहायक हुआ, विंध्याचल ही नहीं संपूर्ण देश से चेचक बड़ी माता का प्रकोप समाप्त हुआ।आज उसी कीर्तन रूपी मंत्र का अनुसरण विंध्याचल का समाज कर रहा है। मां विंध्यवासिनी का धाम उक्त कीर्तन से गूंज रहा है ।
जय मां दुर्गे जय मां तारा दयामई कल्याण करो। लगभग 3 माह से देवी भक्तों के लिए मां विंध्यवासिनी मंदिर बंद है।केवल आरती पूजन ही हो पा रहा है। इस बात को लेकर पंडा समाज और विंध्याचल का सर्व समाज चिंतित है तमाम आस्थावान मां के दर्शन से वंचित हो रहे हैं।
आस्थावान के चिंता में यहां का समाज निरंतर मंथन चिंतन कर रहा है। और अति शीघ्र मां विंध्यवासिनी के दर्शनार्थ देवी मंदिर खुलने की संभावना बलवंती हो रही है।
कोरोनावायरस महामारी के कारण और उससे उत्पन्न लॉकडाउन ! विंध्याचल निवासियों का एकमात्र जीविका का साधन मां विंध्यवासिनी मंदिर है और स्रोत तीर्थयात्री हैं।
तीर्थ यात्रियों के दर्शन को लेकर यहां का समाज हर दिन चिंतन और मनन कर रहा है।




