किताबों में समाया नया पुराना साहित्य संसार

इलाहाबाद। न कभी प्रेमचंद ,निराला , महादेवी का ज़माना ख़त्म होगा और न “मधुशाला “, “गुनाहों का देवता”, “राग दरबारी” जैसे काव्य व कथा साहित्य को भूल पाएँगे । नये के बीच पुराना साहित्य हरदम अपना-अलग आयाम पेश करेगा ।यह निष्कर्ष उन साहित्यप्रेमियों को देखकर लगाया जा सकता है जो यहाँ जी. जी. आई.सी ग्राउण्ड , पत्थर गिरिजा, सिविल लाइन्स में चल रहे 10 वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में आ रहे हैं। अपना आधा सफ़र तय कर चुके इस पुस्तक मेले में 10% की न्यूनतम छूट के साथ पुस्तकें उपलब्ध हैं।

पुस्तक मेले की शान बने नेशनल बुक ट्रस्ट हिन्दी-इंग्लिश की नवयुवा विषयों ,विश्व-साहित्य व भारतीय भाषाओं रे अनुदित साहित्य की ढेरों किताबों के साथ आए हैं।मेले में पहली बार आए सस्ता साहित्य मंडल के स्टाल पर साहित्य के संग ही अन्य विषयों की भी किताबें उपलब्ध हैं।मंथन प्रकाशन के स्टाल पर युवाओं का रुझान अधिक हैं। यहाँ परीक्षा मंथन सीरिज़ के तहत प्रशासनिक परीक्षाओं के संग लगभग सभी विषयों की प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी स्तरीय किताबें आकर्षण का केन्द्र हैं।

पुस्तक मेले में “अनवर जलालपुरी” की “उर्दू शायरी में गीता” की माँग भी बनी हुई हैा बच्चों की नई कलेवर की पुस्तकें व स्टेशनरी अपनी तरफ़ बच्चों का ध्यान आकर्षित कर रहीं है।हर वर्ग के पुस्तक प्रेमी के लिए पुस्तक मेले में कुछ न कुछ अवश्य हैं।ओशो प्रेमियों के लिए ओशो साहित्य डॉयमण्ड पॉकेट बुक्स के व ओशो दर्शन के स्टाल पर उपलब्ध है तो दलित चिन्तन और बौद्ध साहित्य के प्रेमियों को भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सम्यक् प्रकाशन अपनी सम्पूर्ण श्रृंखला के साथ मौजूद है।केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय का स्टाल भी लगा है जिस पर क्षेत्रीय एवं विदेशी भाषा ,देवनागरी लिपि तथा हिंदी -वर्तनी का मानकी करण उपलब्ध है।

सांस्कृतिक मंच पर लखनऊ से प्रकाशित रेवान्त पत्रिका की सम्पादक डॉ अनीता श्रीवास्तव के द्वारा “एक शाम कविता के नाम”काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें अनीता श्रीवास्तव , संध्या सिंह ,रूपा पाण्डेय”सतरूपा”,रेनू द्विवेदी , महक जौनपुरी,रे्नुराज सिहं,डॉ अर्चना श्रीवास्तव , विवेक सत्यांशु, शिवराम उपाध्याय, सरस दरबारी,सुनीता अग्रवाल,गुलरेज इलाहाबादी,उर्वशी उपाघ्याय ने काव्यपाठ किया।
रुपा शतरूपा ”पाण्डेय ने कहा कि” मैं बहता हुआ दरिया जो पत्थर तोड़ देता है,मेरा विश्वास टूटे दिल के टुकड़े जोड़ देता है” वेदना संवेदना तुम, बन्दगी परमार्थ हो तुम। वायु हो तुम प्राण हो तुम,प्रेम का भावार्थ हो तुम।
रेनु द्विवेदी
कला कक्ष के अन्धकार में,रची गई थी मैं,
सहला रहे थे जो हाथ,कोख की अन्धेरी दुनिया में।सुनीता अग्रवाल

लोकार्पण के क्रम में यश मालवीय की पुस्तक “वक़्त का मैं लिपिक” का लोकार्पण हुआ जिसमें डॉ राजेन्द्र कुमार, हरीश चंद पांडेय,अली अदमद फ़ातमी ,मुश्ताक़ अली,डॉ अनीता गोपेश/उर्मिला जैन,शाश्वत रतन/डॉ महेन्द्र राजा जैन उपस्थित थे।मंच संचालन धनंजय चोपड़ा ने किया।


