पूर्वजों की आत्मा की शांति और तर्पण के निमित्त श्राद्ध आज से आरंभ

गंगा किनारे घाटों पर लोगों ने किया पिंडदान
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। चार महीने रहने वाला चतुर्मास इस साल पूरे पांच महीने का हो गया है. वहीं, लीप वर्ष के कारण अधिक मास दो महीने का हो गया है. जहां आमतौर पर श्राद्ध समाप्ति के अगले दिन नवरात्र आरंभ हो जाते थे। वहीं इस बार नवरात्र लगभग एक महीने के अंतराल के बाद होंगे। ऐसा संयोग 160 साल बाद पड़ा है। पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। यहां श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने से है। श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजों को एक विशेष समय में 15 दिनों की अवधि तक सम्मान दिया जाता है। इस अवधि को पितृ पक्ष अर्थात श्राद्ध पक्ष कहते हैं। हिंदू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य का प्रवेश कन्या राशि में होता है तो उसी दौरान पितृ पक्ष मनाया जाता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान को सर्वोत्तम माना गया है.

