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अध्यक्ष व सदस्यों का यथाशीघ्र हो चयन, जुवनाइल जस्टिस बोर्ड मामले में हाईकोर्ट का आदेश

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के प्रत्येक जिले में जुवनाइल जस्टिस बोर्ड के अध्यक्ष व सदस्यों का यथाशीघ्र चयन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि भविष्य में पद खाली होने से छह माह पहले ही चयन प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

कोर्ट ने कहा कि बोर्ड का न होना संविधान के अनुच्छेद 15(3) एवं संयुक्त राष्ट्र संघ की बाल अधिकार संधि का खुला उल्लंघन है। यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता एवं न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने ईश्वरी प्रसाद तिवारी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

कोर्ट ने आशा व्यक्त की है कि सरकार जुवनाइल जस्टिस एंड चाइल्ड वैलफेयर एक्ट के प्रावधानों के अनुसार अपना दायित्व निभाएगी। याचिका पर अधिवक्ता अनुराग यादव व राज्य सरकार के अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाहा ने बहस की।

कोर्ट ने कहा कि 11 दिसंबर 1992 को भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ की बाल अधिकार संधि को स्वीकार किया। इसके अलावा संविधान में बच्चों को समाज की रीढ़ बताते हुए राज्य को इनके अधिकारों की रक्षा करने का निर्देश दिया गया है। कई बार कानून में बदलाव किया गया और 2015 में जुवनाइल जस्टिस ( केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट 2015 लागू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक जिले में जुवनाइल जस्टिस बोर्ड का गठन किया जाना है।

सरकार ने 14 दिसंबर 2016 को हर जिले में कमेटियां गठित कीं। उनका टर्म समाप्त होने के बाद नियमित चयन होने तक तदर्थ व्यवस्था की है और पूर्व न्यायमूर्ति वीएन माथुर की चयन कमेटी बनाई है। 31जनवरी 2021 तक चयन प्रक्रिया पूरी करने की जानकारी दी गई है। इससे पहले भी सरकार की तरफ से लखनऊ बेंच को जून 2020 तक चयन पूरा करने का आश्वासन दिया गया था।

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