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सनातन धर्मावलंबी मां भगवती की साधना में लीन

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन सोमवार को मइया के चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन हुआ।

शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन हुआ।

 

सुबह-शाम मां के चित्र व प्रतिमा के समक्ष देशी घी का दीपक जलाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करके उनसे भय से मुक्ति व आत्मसम्मान की प्राप्ति की कामना की गई। सोमवार को मां अलोपशंकरी के दरबार में मेला लगता है।

कोरोना संक्रमण के कारण मेला नहीं लगा। हालांकि, दूरदराज से आए भक्तों ने मइया के पालने का दर्शन किया। कोरोना संक्रमण के कारण पालने को स्पर्श करने की मनाही रही। दूर से दर्शन करके चुनरी, नारियल व पुष्प अर्पित कराकर मनोवांछित फल प्राप्ति की कामना की। वहीं, सिद्धपीठ मां ललिता देवी व कल्याणी देवी का आभूषणों व पुष्प अर्पित करके आशीष लिया। मंदिर परिसर में जनकल्याण को चल रहे शतचंडी यज्ञ में मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां डाली गई। सिद्धपीठ मां कल्याणी देवी का मनोरम श्रृंगार किया गया। रत्‍‌नजड़ित आभूषण व पुष्पों से सजीं मां का दर्शन करके भक्त भावविभोर हो गए। इसी प्रकार चंद्रघंटा स्वरूपा मां खेमा माई का विधि-विधान से पूजन हुआ। मइया का दर्शन करके भक्त निहाल हो गए। मां का दर्शन-पूजन व गर्भगृह की परिक्रमा करके वैभव, यश, कीर्ति की प्राप्ति की कामना की।

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