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थाने में अवैध निरुद्धि पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

(अनुराग शुक्ला)प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। हाईकोर्ट ने एक युवक को कैंट थाने में अवैध रूप से चार दिन तक निरुद्ध रखने को लेकर दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर राज्य सरकार से दो दिन में जवाब मांगा है।
यह आदेश रविवार को बैठी न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर एवं न्यायमूर्ति समित गोपाल की विशेष खंडपीठ ने सुमन केसरवानी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अधिवक्ता ऋतेश श्रीवास्तव को सुनकर दिया है। याचिका के अनुसार धूमनगंज के राज केसरवानी का सात जुलाई की शाम दरवाजे से अपहरण कर लिया गया। राज की मां ने धूमनगंज थानाध्यक्ष से गुहार लगाई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आठ जुलाई को पता चला कि राज को कैंट थाने के टार्चर रूम में रखा गया है। कैंट थाने से इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया गया कि राज मजिस्ट्रेट के सामने क्यों पेश नहीं कर रहे हैं। दस जुलाई को पुलिस को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की मांग भी की गई। 112 पर डायल करके सूचना दी गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। एसएचओ सिविल लाइंस कैंट थाने गए थे। उनसे पूछा तो कहा कि वह कैंट थाना इंचार्ज नहीं हैं। एडवोकेट ऋतेश श्रीवास्तव के अनुसार याची के बेटे को किस केस में गिरफ्तार किया गया है, पुलिस यह नहीं बता रही थी तो हाईकोर्ट को पत्र लिखकर पुलिस की अवैध निरुद्धि से कोर्ट में पेश करने की गुहार लगाई गई। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमएन भंडारी ने स्पेशल पीठ गठित की और रविवार को विशेष खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने कोर्ट को बताया कि 30 जून को सिविल लाइंस थाने में दर्ज केस के सिलसिले में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एसओजी ने राज को गिरफ्तार किया है और रविवार को उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा प्रथमदृष्टया अवैध निरुद्धि नहीं लगती है। साथ ही राज्य सरकार से दो दिन में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

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