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वक्त मिल जाये तो गुनगुना लीजिये ज़िंदगी ग़ज़ल है इसे गा लीजिये

वक्त मिल जाये तो गुनगुना लीजिये
ज़िंदगी ग़ज़ल है इसे गा लीजिये
जवानी बहते पानी सी है
इससे पहले गुज़र जाए
इतरा लीजिये
ज़िंदगी ग़ज़ल है इसे गा लीजिये
वक्त मिल जाये तो गुनगुना लीजिये
धूप में छांव में
ज़िंदगी के हर गांव में
मुस्करा के दिन बिता लीजिये
ज़िंदगी ग़ज़ल है इसे गा लीजिये
वक्त मिल जाये तो गुनगुना लीजिये
सच के भेष में , झूंठ के फरेब में
जो भी जैसा मिले मज़ा लीजिये
ज़िंदगी ग़ज़ल है इसे गा लीजिये
वक्त मिल जाये तो गुनगुना लीजिये
पिछली बातों को , उनकी यादों को
जागती रातों को, अनकही बातों को न हवा दीजिये
ज़िंदगी ग़ज़ल है इसे गा लीजिये
वक्त मिल जाये तो गुनगुना लीजिये
“यश शर्मा”

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