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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर फिर उठाए गए सवाल

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती पर फिर से सवाल खड़े हुए हैं। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने अपने ही नियम-शर्तों की अनदेखी कर अभ्यर्थियों का चयन कर दिया। इस गड़बड़ी का खुलासा आरटीआई में हुआ है। आयोग ने विज्ञापन संख्या 47 के समाजशास्त्र विषय में अनारक्षित वर्ग में चयनित 166 अभ्यर्थियों में से आरक्षित वर्ग के पांच ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया है जिनके अंक परास्नातक में 55 प्रतिशत से कम है।
विज्ञापन की शर्तों के अनुसार स्नातकोत्तर स्तर पर 55 प्रतिशत अंक में अनिवार्य शैक्षिक अर्हता थी। मेरिट में मामूली अंकों से चूकने वाले अभ्यर्थियों ने आयोग से आरटीआई में सूचना मांगी तो पता चला कि ओबीसी के तीन ऐसे अभ्यर्थियों का अनारक्षित श्रेणी में चयन हुआ जिन्हें पीजी में 50.90, 53.30 और 54.27 प्रतिशत अंक मिले थे। इसी प्रकार एससी के दो ऐसे अभ्यर्थियों का अनारक्षित वर्ग में चयन हुआ है जिन्होंने पीजी में 54.29 और 52.89 फीसदी प्राप्त किए थे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि विज्ञापन में आरक्षण का लाभ लेकर ओबीसी और एससी में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का चयन उनके वर्ग में ही होना चाहिए। अंक अधिक होने पर भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वे अनारक्षित श्रेणी में शामिल नहीं हो सकते। गौरतलब है कि विज्ञापन संख्या 47 में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1150 पदों में से 273 समाजशास्त्र विषय के थे। इनमें से अनारक्षित वर्ग के 166 पदों में अनियमितता हुई है।

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