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हरतालिका तीज व्रत से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। हरतालिका तीज का त्योहार प्रत्येक भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

 

 

शास्त्रों के अनुसार, त्योहारों में हरतालिका सबसे बड़ी तीज होती है। यह व्रत सर्वप्रथम मां पार्वती ने किया था। इसलिए इसे बेहद खास व्रत माना गया है। सुहागिनों को ये व्रत करने से भगवान शिव-मां पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। चूंकि मां पार्वती ने ये व्रत करते हुए अन्न-जल त्याग दिया था, इसलिए इस व्रत को करने वाली महिलाएं अन्न जल ग्रहण नहीं करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
यह व्रत 09 सितम्बर को मनाया जायेगा। यह व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए रखती हैं। इस व्रत को सभी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है, क्योंकि यह व्रत निर्जला रखा जाता है। कुंवारी कन्याएं हरतालिका तीज व्रत को सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं। इसके लिए महिलाओं ने बुधवार को सामान खरीद कर तैयारी शुरू कर दी है। हिन्दू धर्म शास्त्रों मे वर्णन किया गया है कि भगवान शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने इस व्रत को किया था। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम के वक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। इस व्रत का विधान आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति की प्राप्ति, चित्त और अन्तरात्मा की शुद्धि, संकल्प शक्ति की दृढ़ता, वातावरण की पवित्रता के लिए लाभकारी माना जाता है।

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