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अमावस्या पर पिंडदान के साथ वंशजों को आशीष देकर पितर पृथ्वी से विदा हुये


संगम तट पर पिंडदान, तर्पण व श्राद्ध का सिलसिला सुबह से आरंभ

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज अमावस्या तिथि पर संगम किनारे आस्था की अद्भुत छटा बिखरी हुयी थी। पूर्वजों के प्रति समर्पण व श्रद्धाभाव से ओतप्रोत वंशज संगम तट पर पहुंचे और पिंडदान, तर्पण व श्राद्ध का सिलसिला सुबह से आरंभ हो गया। मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान व तर्पण करके पूर्वजों का भावपूर्ण स्मरण किया। पूजन के दौरान कुछ लोगों की आंखें नम हो गईं। अमावस्या तिथि पर पिंडदान होने के साथ वंशजों को आशीष देकर पितर पृथ्वी से विदा हो गए। अगले वर्ष पितृपक्ष पर पुन: उनका आगमन होगा।
बता दे कि पितृपक्ष में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान व तर्पण करने का विधान है। आश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिप्रदा से पितृपक्ष आरंभ हुआ। प्रयागराज में संगम तट पर पिंडदान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बिना यहां तर्पण व पिंडदान किए मृतक आत्मा को तृप्ति नहीं मिलती। यहां पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होकर वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीष देते हैं। वहीं, पिंडदान व तर्पण न करने वाले लोगों के पूर्वज नाराज हो जाते हैं। इससे वंशजों को शारीरिक, मानसिक व आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि देश के विभिन्न जिलों से लोग संगम तट पर पिंडदान, तर्पण व पूजन करने आते है।

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