कायस्थ पाठशाला की अरबों रुपये की जमीन को बिल्डर को देकर शापिंग मॉल होटल व दुकानें बनाने की तैयारी

ट्रस्ट के प्रति समर्पित कायस्थ समाज के लोग दुखी व व्यथित हैं
ट्रस्ट ने अपनी नीतियां न बदली तो हाई कोर्ट में याचिका दाखिल
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। एशिया के सबसे बड़े ट्रस्ट कायस्थ पाठशाला की स्थापना शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के लिए हुआ है। ट्रस्ट स्थापित करने वाली विभूतियों की मंशा थी । कि समाज के गरीब, मजलूमों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाया जाय ।मुंशी काली प्रसाद जैसे महापुरुषों ने इसके लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। ट्रस्ट के जरिए तमाम स्कूल, कालेज व डिग्री कालेज बनाए गए हैं। दुर्भाग्यवश ट्रस्ट की मौजूदा कार्यकारिणी उनके सपनों, नीतियों व विचारों के विरुद्ध काम कर रही है। मौजूदा पदाधिकारी ट्रस्ट को विस्तार देने के बजाय उसकी संपत्ति व जमीनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। जिससे ट्रस्ट का नुकसान हो रहा है। अब ट्रस्ट की जमीन विजातीय बड़े बिल्डर को देने की तैयारी चल रही है। आज प्रेस वार्ता के दौरान जेपी श्रीवास्तव अजय श्रीवास्तव डॉक्टर सुनील सिन्हा दिलीप कुमार श्रीवास्तव प्रेम प्रकाश कुलश्रेष्ठ अरुण कुमार श्रीवास्तव जो कार्यकारिणी सदस्य सोते हुए आज बताया जो सीएमपी डिग्री कालेज के सामने लगभग पांच एकड़ जमीन पर जिस पर मौजूदा समय इंडियन ह्यूम पाइप का वर्कशाप है। जिसके पट्टे का करार समय सीमा खत्म हो चुका है। वर्कशाप को हटाने का मामला कोर्ट में लंबित है। अब अरबों रुपये की उसी जमीन को बिल्डर को देकर शापिंग मॉल होटल व दुकानें बनाने की तैयारी चल रही है।
जो ट्रस्ट की नीतियों के विपरीत है। इससे ट्रस्ट के प्रति समर्पित कायस्थ समाज के लोग दुखी व व्यथित हैं। हर ट्रस्टी चाहता है कि खाली होने वाली जमीन पर कोई विद्यालय अथवा उत्कृष्ट सुविधायुक्त अस्पताल बनाया जाय, जिससे आम जनमानस को उसका लाभ मिल सके।अस्पताल बनेगा तो लोगों का बेहतर इलाज होगा। लेकिन ट्रस्ट के पदाधिकारी उस पर तैयार नहीं हैं। वे 1921 के मास्टर प्लान का हवाला देते हुए कहते हैं कि उस समय उक्त जमीन पर बस अड्डा बनने का प्रस्ताव था।
जबकि यह मास्टर प्लान की अवधि खत्म हो चुका है। अगर ट्रस्ट ने अपनी नीतियां न बदली तो हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करके कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। साथ ही धरना-प्रदर्शन शुरू करके पुरजोर विरोध होगा, लेकिन किसी बिल्डर को जमीन नहीं लेने दिया जाएगा।
सदस्यता के नाम पर धांधली कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट सदस्यता के नाम पर धांधली करती है। जो कायस्थ नहीं हैं। उन्हें भी सदस्य बनाकर चुनाव में वोट डलवाया जाता है। आजकल हर चीज आनलाइन है। लेकिन कायस्थ पाठशाला के सदस्यों की सूची अभी आनलाइन नहीं की गई है। ट्रस्टी से मांग करते हैं ।
कि समस्त सदस्यों की सूची आधार कार्ड से जोड़कर आनलाइन की जाय, जिससे उसमें पारदर्शिता रहे तथा नये ट्रस्टी बनने की प्रक्रिया एवं उसके लिये आवश्यक धनराशि जमा करने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाय जिसे जानबूझकर ऑफलाइन करने के साथ ही फार्म प्राप्त करने के साथ ही इतने अवरोध किये जाते है कि जिले के कायस्थ भी सदस्य नही बन पाते या उन्हे बनाया। नही जाता, दूरदराज रहने वाले कायस्थ भाई बहनों के लिए तो दरवाजे ही बन्द है।


