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ससुराल वाले महिला को कर रहे हैं प्रताड़ित खुल्दाबाद थाने की पुलिस भी नहीं कर रही कोई कार्रवाई

अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ मायके में रहने पर मजबूर पीड़िता माला

न्याय की आस में बच्चों व मायके वालों के साथ एस0एस0पी आफिस और थाने का चक्कर काट रही है माला, नहीं हो रही कोई सुनवाई

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। नगर के खुल्दाबाद थाना क्षेत्र अन्तर्गत करबला मोहल्ला की रहने वाली (40) वर्षीया माला सोनकर ससुरालीजनों से आहत अपने दो नाबालिग बच्चों को लेकर न्याय की आस में दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर है, लेकिन संबंधित थाना खुल्दाबाद पुलिस बजाये उसकी व उसके बच्चों की मदद करने के उल्टे थाना में घण्टों बिठाने के बाद कार्रवाई के नाम पर झूठा आश्वासन देकर खानापूर्ति करने के बाद वापस भेज दे रही है। वर्तमान में माला बच्चों सहित लीडर रोड स्थित अपने मायके में रह रही है।
प्राप्त जानकारी व एस0एस0पी आफिस एवं संबंधित थाना खुल्दाबाद पुलिस को कार्रवाई हेतु पीड़िता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर पर मामला कुछ इस प्रकार है। लीडर रोड गढ़ी मोहल्ला निवासी मेवालाल सोनकर की पुत्री माला सोनकर का विवाह वर्ष 2002में करबला मोहल्ला के रहने वाले रामचंद्र सोनकर पुत्र सुनील कुमार सोनकर से हुआ था।
आर्मी मेंआफीसर पद पर रहे पिता ने माला की शादी में दहेज में नगद व कीमती सामान और एक भारी भरकम दहेज देकर अपने दरवाजे से विदा किया था।
पीड़ित पक्ष की मानी जाए तो शादी के कुछ साल तो ठीक ठाक गुजरे लेकिन सास बिटटी देवी ननदें और माला के देवर देवरानियों के द्वारा उसे प्रताड़ित किया जाता रहा, जिससे आहत माला अपने मायके अपनी जान बचाकर चली आती थी। फिर बाद में रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से सुलह समझौता हो जाता था।
इस बीच माला ने दो बच्चों एक बेटी व एक बेटे आदित्य को जन्म दिया वर्तमान में आदित्य की उम्र(12) वर्ष एवं सौम्या की (14) वर्ष है। बरहाल आज माला की शादी हुए 19 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन उसके ससुराल वालों के रवैये में कोई कमी नहीं आयी है,समय बीतने के साथ साथ उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया रहा है। प्रताड़ित करने का सिलसिला बदस्तूर आज भी जारी है,अभी हाल ही में विगत माह 25 सितंबर को माला के पिता मेवालाल का देहान्त हृदयागति रूक जाने के कारण हो गया था। पिता की मृत्यु की ख़बर पाकर माला दोनों बच्चों आदित्य और सौम्या को साथ लेकर लीडर रोड स्थित अपने पिता के अन्तिम दर्शन व संस्कार में शामिल होने के लिए मायके चली आयी। पितृपक्ष व शारदीय नवरात्र की समाप्ति के बाद पिता के त्रयोदशा संस्कार (तेरहवीं) के बाद 21अक्टूबर को माला बच्चों संग जब करबला मोहल्ला अपने ससुराल पहुंची तो उसकी सास,देवर, देवरानियों और ननदों ने माला को उसके कमरे में प्रवेश करने से रोकना चाहा तो सबने उसे और बेटी सौम्या के साथ सामूहिक मारपीट की व गाली गलौज करने लगे,इस पूरे प्रकरण में माला का पति, सुनील तमाशबीन खड़ा सबकुछ देखता रहा उसकी पत्नी माला और बेटी सौम्या पिटते रहे,आदित्य किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकला और मार खाने से बच गया। माला और सौम्या पिटते रहे लेकिन वहां से हटे नहीं किसी तरह पिटते मार खाते हिम्मत न हारते हुए जब अपने कमरे में पहुंचे तो कमरे का टूटा ताला खाली देखकर उनके होश फाख्ता हो गए, क्योंकि कमरा पूरी तरह से खाली पड़ा था कमरे में रखे सारे सामान गायब थे।
किसी तरह ससुराजनों से बचते बचाते मां बेटी वापस लीडर रोड आये अपने ऊपर किये गये अत्याचार के बारे में लिखित तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय व संबंधित थाना खुल्दाबाद में खुद के ऊपर हुए शारीरिक मानसिक प्रताड़ना के लिए 22 अक्टूबर को थाना खुल्दाबाद में तहरीर दी, सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर तक माला और उसके मायके पक्ष के लोग थाने पर बैठे रहे लेकिन बजाये उनकी मदद करने के टरका दिया गया। तहरीर में पीड़िता माला की ओर से सास बिटटी देवी,देवर लालचन्द्र (लड्डू) देवरानी नेहा, ननदें मोनी,नीलम के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कर न्याय की मांग की थी लेकिन उसके प्रार्थना पत्र के आधार पर मुकदमा दर्ज करने के बजाए समझौते के लिए रात्रि 12 बजे तक थाने में बिठाये रखा गया, क्योंकि बीजेपी के कई बड़े लीडरों के फोन इन्सपेक्टर के पास धड़ाधड़ आने लगे।
लेकिन माला व उसके मायके पक्ष के लोग प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग के लिए डटे रहे दोनों पक्ष के वकील भी थाने पर मौजूद थे दिखावे के लिए पुलिस ने माला के पति सुनील व उसके देवर लालचन्द्र को लाकअप में डाल दिया।माला की तरफ से पैरवी करने वालों की संख्या चार पांच लोगों से अधिक नहीं थी, और दोषियों की पैरवी करने के लिए पचासों लोग शामिल रहे जिनमें छुटभैय्ए नेताओं की संख्या ज्यादा थी। इसी दौरान बीजेपी के एक सांसद का फोन भी मामले की देख-रेख कर रहे इन्सपेक्टर के पास दोषियों के बचाव में आ गया फिर तो सारा मामला ही उलट गया, अपनी बहन माला के साथ पैरवी करने गये उसके बड़े भाई राजकुमार सोनकर (पप्पू) को भी पुलिस ने दोषियों के साथ बन्द कर दिया। दोनों ओर से हल्की धारा लगाकर क्रास एफआईआर दर्ज ली गई। खुल्दाबाद थाने की पुलिस के इस अन्यायपूर्ण रवैये से आहत आधी को अपने मायके रोते बिलखते पहुंची। और अगले दिन कचहरी पहुंचकर अपने बड़े भाई राजकुमार खुद की व अन्य भाइयों सहित पति सुनील की भी जमानत करवायी दोषियों को भी कोर्ट से जमानत मिल गई,और वे मजलूम माला और उसके बच्चों पर कहकहे लगा रहे थे। बेबस माला आंखों में आंसू भरे बिलखती रही।कानून और पुलिस से उसका व उसके दो मासूम नाबालिग बच्चों का भरोसा उठ गया है,अब वह पूरी तरह से मायके वालों के आश्रित हैं, भविष्य की चिंता है मायके वाले भी आर्थिक तौर पर कमजोर हैं, पिता की पेंशन से उसका और बच्चों का गुजर बसर हो जाता था पिता के देहांत के बाद ये रास्ता भी बंद होता नजर आ रहा है। निकम्मे पति के चलते माला और उसके बच्चों का भविष्य गर्त में चला गया है, पुलिस से भी उसे कोई मदद नहीं मिली, उसकी सारी आस टूट चुकी है।
समाचार लिखे जाने तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई उक्त मामले में नहीं की गई है जो कि संबंधित थाना पुलिस पर एक सवालिया निशान उठाती है?

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