
नेशनल डेस्क। खास बात यह है कि विभाग सिर्फ आपके द्वारा दी गई जानकारियों पर ही निर्भर नहीं रहता है, बल्कि कई स्रोतों से भी उसे आपके बारे में जानकारियां मिलती हैं. ऐसे में इनकम संबंधी किसी जानकारी को छुपाना आपके लिए महंगा पड़ सकता है.

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2018 है. लेकिन जाने-अनजाने आप आईटीआर में अक्सर 5 तरीके की इनकम बताना भूल जाते हैं. जबकि अब इनकम टैक्स विभाग इस मामले में काफी सख्त हो गया है. खास बात यह है कि विभाग सिर्फ आपके द्वारा दी गई जानकारियों पर ही निर्भर नहीं रहता है, बल्कि कई स्रोतों से भी उसे आपके बारे में जानकारियां मिलती हैं. ऐसे में इनकम संबंधी किसी जानकारी को छुपाना आपके लिए महंगा पड़ सकता है. आज हम उन 5 इनकम की बात कर रहे हैं जिसे आईटीआर में बताना अक्सर आप भूल जाते हैं-

सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला रिटर्न या ब्याज: बड़ी संख्या में लोगों को यह पता नहीं होता है कि सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज भी टैक्स के दायरे में होता है. हालांकि अगर सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला सालाना ब्याज 10,000 रुपए है तो इस पर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है, लेकिन इंटरेस्ट इनकम इस सीमा से अधिक होने पर इस पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है.

पोस्ट ऑफिस टर्म डिपॉजिट: पोस्ट ऑफिस के टर्म डिपाजिट पर मिलने वाला ब्याज भी पूरा टैक्सेबल होता है. इसलिए आईटीआर फाइल करने के दौरान आपको इसका भी उल्लेख करना चाहिए. लेकिन लोग अक्सर ऐसा करना भूल जाते हैं. इससे इनकम टैक्स विभाग का नोटिस उनके पास आ जाता है.

रेकरिंग डिपॉजिट्स: रेकरिंग डिपॉजिट्स (Recurring Deposits) पर मिलने वाला पूरा ब्याज भी टैक्सेबल होता है. ऐसे में अगर आप ईमानदार करदाता हैं तो आपको इसका भी उल्लेख करना चाहिए, नहीं तो बाद में दिक्कत हो सकती है.

किराएदारों से मिलने वाला रेंट: किराएदारों से मिलने वाले पैसे को आईटीआर में बताना भी जरूरी है. लेकिन नौकरी-पेशा लोग अक्सर इसे इसलिए नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि इसका भी उल्लेख फॉर्म-16 में नहीं होता है.

नाबालिग बच्चों की आय: अगर किसी परिवार में नाबालिग बच्चे भी विज्ञापन, किसी एड फिल्म, सीरियल या फिर फिल्म के माध्यम से कमाई करते हैं तो उस आय को माता-पिता (जिसकी भी कमाई ज्यादा हो), उसकी कमाई में जोड़ दिया जाता है और फिर उस पर टैक्स देनदारी बनती है.




