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चैरासी योनियों में भ्रमण के बाद मिलती है नर देह- महामंडलेश्वर कौशल्या नंदगिरी टीना मां

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । माघ मेले के किन्नर अखाड़े में भक्तों को आशीर्वाद देते हुए । महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी टिना माँ ने भक्तों को मानव जीवन पर बताते हुए कहा कि जीव किसी भी योनि में हो वह अपने सुख की चिन्ता करता है। वह जिस देह में होता है। उसी देह से प्रेम करने लगता है। महामंडलेश्वर कौशलयानंद गिरि ने बताया चैरासी लाख योनियों में भ्रमण करते हुए तब कहीं उसे नर देह मिलती है। इसलिए हमें इस मानव शरीर से अच्छे-अच्छे काम करना चाहिए। तभी मनुष्य के जन्म पूर्ण उदय होगा। महामंडलेश्वर कौशल्या नंदगिरी ने बताया कि जीव किसी भी योनी में हो निंरतर अपने सुख की चिन्ता करता रहता है तथा जिस देह में होता है उसी देह से वह प्रेम करने लगता है। महामंडलेश्वर कौशल्या नंदगिरी ने कहा चैरासी लाख योनियों में भ्रमण करते हुए तब कहीं उसे नर देह प्राप्त होती है। जिसमें ग्रन्थों में तथा विद्वानों के अनुसार कहा जाता है कि बडे भाग्य मानुस तन पावा, सुर दुर्लभ सद ग्रन्थन गावा। इस भव सागर से पार जाने के लिए मानव देह ही नाव है। इसलिए इस शरीर से अच्छे-अच्छे काम करने चाहिए। हाथो से सन्तो की सेवा एवं दान करना चाहिए।

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