महिलाओं की आबादी कमजोर होने से भारत की प्रगति में अवरोध: डॉ. रमा सिंह
(अनुराग शुक्ला )प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। महिलाएं भारत की आधी आबादी हैं। यदि यह आबादी कमजोर रह जायेगी तो भारत की प्रगति में अवरोध का कारण बनेगी। बालिकाओं को सदैव इस बात के लिए सचेत रहना पड़ेगा कि अधिकार थाली में परोस कर नहीं मिलता, इसे संघर्ष से लेना पड़ता है।
यह बातें आर्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रमा सिंह ने सोमवार को राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवा की चारों यूनिट की स्वयंसेविकाओं को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए भारत में बने कानूनों के प्रति और अपने अधिकारों के प्रति बालिकाओं को जागरूक होना पड़ेगा। जागरूकता से ही दूरगामी और स्थायी समाधान मिलता है। अध्यक्ष शासी निकाय पंकज जायसवाल ने कहा कि वे शारीरिक, मानसिक किसी भी रूप में पुरुषों से कम नहीं हैं, इसलिए स्वयं को अबला न समझें। इस बात के प्रति वह बहुत सचेत रहें कि औरत होकर भी औरतों का शोषण न करें। माता बालक की प्रथम शिक्षक होती है। यदि उसका विकास ही नहीं होगा तो भारत के भविष्य का विकास कैसे होगा ? आर्य समाज का कॉलेज होने के कारण यहां की शिक्षिकाओं पर बालिकाओं के विकास की अतिरिक्त जिम्मेदारी है। क्योंकि आर्य समाज का उदय ही महर्षि दयानन्द सरस्वती के बालिका शिक्षा के विशेष अभियान के साथ महिलाओं के उत्थान के लिए हुआ था।
उप प्राचार्या डॉ. ममता गुप्ता ने स्वयंसेविकाओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि शिक्षित होकर अपने परिवार एवं समाज में अपना योगदान हेतु तत्पर होना चाहिए। कार्यक्रम में चारों यूनिट की स्वयंसेविकाओं जिनमें प्रिया सरोज, आयुषी, संजना, ऋचा, आरती, नेहा त्रिपाठी, आयुषी केसरवानी, आस्था, श्रद्धा, पिंकी, नेहा पाण्डेय आदि ने गीत, कविता पाठ, स्लोगन से अपने विचारों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुपमा सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ ज्योति रानी जायसवाल ने किया। संयोजन डॉ. मुदिता तिवारी एवं डॉ. अर्चना सिंह ने किया।



