राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी शालिनी धुरिया की हत्या में कहीं रईस बापों की बिगड़ैल औलादों का हांथ तो नहीं

शालिनी की हत्या सोची समझी साजिश या नशे में धुत्त रईसों का हुई शिकार
पुलिस के सामने कड़ी चुनौती कहीं गलत दिशा में तो नहीं मार रही तीर
शालिनी की हत्या करने और उसकी लाश को ठिकाने लगाने में कितने लोग शामिल थे
(राजेश सोनकर ) प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार ) । सिविल लाइंस थाना क्षेत्र अन्तर्गत रविवार की शाम कैन्ट एरिया पोलोग्राउण्ड स्थित कुएं से बोरे में भरा युवती का शव नेशनल फुटबालर व दिल्ली में रहकर प्राइवेट जाब कर रही शालिनी धुरिया (रोली) का था इस बात का खुलासा तो हो गया लेकिन उसके हत्यारे अभी भी पुलिस की पकड़ से काफी दूर हैं सिर्फ उसका प्रेमी रवि और अन्य छोटे स्तर के लोग ही पुलिस के निशाने पर हैं।
मूलरूप से फूलपुर निवासी पेशे से ई- रिक्शा चालक राजेंद्र प्रसाद वर्तमान में परिवार सहित तेलियरगंज शिलाखाना मस्जिद के निकट किराये के मकान में रहते हैं।
उनकी चार संतानों में शालिनी उर्फ रोली दूसरे नम्बर थी उससे बड़ी श्रद्धा व छोटी बहन स्वाति भाई वैभव हैं।
शालिनी नवंबर माह में दिल्ली चली गई थी जहां रहकर वह एक प्राइवेट कंपनी में जाब कर रही थी। रविवार की शाम पोलोग्राउण्ड कुएं से बोरे में भरा शव शालिनी का ही था इस बात की भी शिनाख्त हो गयी शालिनी का रवि नाम के युवक से अफेयर था यह बात शालिनी के हांथ में बने टैटू से पता चली लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि मृतका एक बहुत ही अच्छी राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी भी रही है।
जानकारी के अनुसार शालिनी धुरिया (रोली) को होली में प्रयागराज आना था लेकिन वह अचानक 13 फरवरी को ही आ गयी चूंकि अगले दिन अंग्रेजी त्यौहार” वैलेंटाइन डे” था।
अब यहां पर सवाल यह उठता है कि शालिनी अपने घर न जाकर आखिर किससे मिलने कहां गयी रही होगी? माना वैलेंटाइन डे पर वह रवि से या फिर किसी से भी मिली होगी ये और बात है।
लेकिन हत्या करके उसके शव को पोलोग्राउण्ड के कुएं में ठिकाने लगाने वाले लोग कौन थे?और कितनी संख्या में थे।
कहीं ऐसा तो नहीं कि शालिनी रईस बापों की बिगड़ैल औलादों की नजर में खटक गई थी क्योंकि रात के अंधेरे में बड़े घरानों की की बिगड़ैल नशाखोर औलादों का जमावड़ा नशे में धुत्त होकर शहर के इलाहाबाद बैंक (वर्तमान में इंडियन बैंक) के पीछे, संगम स्थित परेड ग्राउण्ड,थाना कैंट से चंद कदम की दूरी पर बनी लाइब्रेरी व सदर बाजार उंचवा और सीडीए पेंशन आफिस जाने वाले मार्ग के बीच बनी पुलिया जहां शाम को गहरा अंधेरा हो जाता है इन्हीं स्थानों पर लगना चालू हो जाता है जिनके पास हाई फाई मंहगी लग्जरी गाड़ियां होती हैं और गाड़ियों में भरा होता अय्याशी और मौज-मस्ती का हर आइटम। जब इन पर नशा हावी होता है तो नशे में चूर होकर ये र ईजादे गाड़ियां स्टार्ट कर हवा में उड़ने लगते हैं, और इनकी लाल लाल आंखों में दिखाई देती है हवस साथ में किराये पर लायी लड़कियां इनके साथ कभी कभी होती हैं तो कभी नहीं भी।
और जब इनके पास किराये की लड़कियां साथ नहीं होती हैं तो ये पूरी रात शिकार की तलाश में मंडराते रहते हैं।
मतलब बड़ा ही साफ है पुलिस को मृतका शालिनी के प्रेमी व दोस्तों से पूछताछ करने के अलावा धनपशुओं के गिद्धों पर भी कड़ी निगरानी रखनी होगी। उनके बापों का रसूख पैसा और पहुंच देखकर डरना नहीं चाहिए बल्कि कठोरता के साथ ऐसे बिगड़ैल युवकों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ करनी चाहिए क्योंकि हत्या तो राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी की ही गयी है।और उसकी हत्या कहीं और करने के बाद उसके शव को भी एक नहीं दो चार लोगों ने साथ मिलकर आधी रात के बाद अंधेरे और गहरे कुएं में ठिकाने लगाया होगा क्योंकि किसी की हत्याकर शव को अकेले ठिकाने लगाना किसी एक के वश के बाहर है। जाहिर है कि घटना को अंजाम देने के बाद चार पहिया वाहन का इस्तेमाल भी किया गया होगा। ब्लाइंड मर्डर से पर्दा उठाने के लिए जांच पड़ताल में जुटी संबंधित थाने की पुलिस व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इस ओर ध्यान जरूर देना चाहिए हो सकता है कि शालिनी के कातिल पकड़े जायें।



