8 दिवसीय सिद्ध चक्र विधान का आज हुआ समापन

जैन श्रद्धालुओ ने केसरिया वस्त्रों में संगीतमयी धुनों पर १०२४ मंत्रो से भगवान की पूजन अर्चन की
( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री दिगंबर जैन पंचायती सभा प्रयाग के तत्वाधान में ज़ीरो रोड स्थित जैन मंदिर में आचार्य विज्ञान भूषण महाराज के सानिध्य में अष्टानिका का पर्व पर आयोजित किये जा रहे 8 दिवसीय सिद्ध चक्र विधान का 13 जुलाई को समापन हो गया। सिद्धचक्र विधान के आठवे दिन पंडित सुनील जैन के निर्देशन में जैन श्रद्धालुओ ने केसरिया वस्त्रों में भक्तिभाव से संगीतमयी धुनों पर १०२४ मंत्रो से भगवान की पूजन अर्चन की। इस अवसर पर आचार्य विज्ञान भूषण महाराज ने कहा कि जैन धर्म में सबसे बड़ा विधान सिद्धचक्र विधान होता है। यह विधान अनादि निधन विधान है। विधान करने से कर्मों की निजरा होती है। इस विधान से असाध्य रोग दूर होता है। विधान के अंतिम दिन 13 जुलाई को विश्व शांति के लिए महायज्ञ किया गया।
पंडित सुनील जैन ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन जैन धर्म के सभी साधु-साध्वी , सायंकालीन प्रतिक्रमण के उपरांत, चार महीने के लिए एक जगह पर स्थित हो जाते हैं। सारे काल में मौन, जप, तप के द्वारा विशेष आत्मिक शुद्धि करते हैं। जैन इतिहास में पूरे चार मास तक निराहार रहने वाले संतों का उल्लेख मिलता है।
आषाढ़ी पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन विनीत साधक द्वारा अपने इष्ट गुरु के प्रति अपने तन, मन, धन व सर्वस्व का भी समर्पण किया जाता है। गुरु हमें संसार की मोह-ममता से परे हटाकर परमात्मा से मिलाता है।
राहुल जैन ने बताया कि जैन धर्म में गुरु का विशेष महत्व है।बिना गुरु के ज्ञान प्राप्ति संभव ही नहीं है। जीवन मे गुरु की उपस्थिति प्रकाश की तरह होती है जिनके आते ही सारे संशय के अंधकार समाप्त हो जाते है।


