Latest

ब्राह्मण समाज में एकता का सूत्र है विघटन का कारण नहीं हैंः स्वामी महेशाश्रम

ब्राह्मण समाज में एकता का सूत्र है विघटन का कारण नहीं हैंः स्वामी महेशाश्रम

प्रयागराज। श्री सनातन ज्ञान पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी महाराज के लिए एक और नया सिंहासन भक्तों द्वारा भेंट किया गया।

दो पुष्कर योग में श्री सच्चा अध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य एवं श्रीमद्भागवत के रसिक प्रवक्ता डॉ चंद्र देव के द्वारा स्वामी जी को सिंहासनारुढ करके पंचोपचार पूजन एवं चरण पादुका पूजन किया गया।

सभी विप्र बंधु एवं आचार्य धनंजय ब्रह्मचारी, आचार्य ज्ञानेश्वर, आचार्य लवकुश, आचार्य ज्ञानेश, आचार्य नीतीश ने शंकराचार्य जी को माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में बताया कि कलयुग संघर्ष युग होते हुए भी भक्ति एवं भगवत प्राप्ति के लिए उत्तम योग माना गया है।

आज समाज में कुछ स्वार्थी राजनेताओं द्वारा जात-पात का वैवनस्य फैलाकर समाज को सनातन धर्म से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे समय में देश के संतों और ब्राह्मणों का कर्तव्य है कि समाज में सनातन धर्म की सत्यता एवं संप्रभुता का प्रचार-प्रसार कर सनातन को विखंडित होने से बचाने का प्रयास करें। आज कुछ एक ब्राह्मण भी अपने वर्ण की पहचान बताने में शर्म करते हुए देखे जाते हैं, जबकि ब्राह्मण स्वयं एक पहचान है जिससे समाज को ज्ञान प्राप्त होता है। आज वह समय आ गया है कि प्रत्येक ब्राह्मण को अपने नाम के साथ ब्राह्मण लिखना प्रारंभ करना चाहिए क्योंकि ब्राह्मण से ही संपूर्ण समाज को अपनी पहचान एवं सदमार्ग प्राप्त होता है।

ब्राह्मण समाज में एकता का सूत्र है, विघटन का कारण नहीं। ब्राह्मण समाज का नेतृत्वकर्ता है। उसकी उपेक्षा कर समाज सही मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सकता।

Related Articles

Back to top button