गंगा तट सेजरा हट के

ऐतिहासिक किला में सेना द्वारा मां गंगा का पूजन और झंडारोहण कार्यक्रम, जनिये इसका रोचक इतिहास

प्रयागराज। (अनुराग शुक्ला) प्रयागराज के आयुध भंडार किला में पूर्व की भांति इस वर्ष भी दिनांक-01/02/2020 को सुबह 9:00 बजे से किला के सैनिक एवं असैनिक कर्मचारी तथा उनके परिवार गण के सदस्यों द्वारा मां गंगा,भगवान हनुमान और आलोक संकरी जी का झंडारोहण का निशान बड़े हर्ष उल्लास के साथ चढ़ाते हैं।


जिसमें किले के समादेशक महोदय कर्नल विवेक डबास की अगुवाई में यह कार्यक्रम की शुरुआत होगीI किले के सैनिक और असैनिक कर्मचारी के साथ यूनियनों के प्रतिनिधि के महामंत्री सम्मिलित होंगे ।

किले के समादेशक कर्नल विवेक डबास महोदय व उनके परिवार को हाथी,घोड़े और बगही पर बैठकर परंपरागत तरीके से रवाना किया जाता है तथा उनके पीछे कतारबद्ध तरीके से सभी अनुभागओ के वरिष्ठ सेना अधिकारी किला के सेना नायक के पीछे अपने अपने ध्वज के साथ अश्व पर सवार होकर तथा बैड बाजे के साथ सैनिक व असैनिक कर्मचारियों गगनभेदी स्वरों के साथ संगम स्थल पर निर्रधारितपूजा- स्थल संगम तट पर पहुंच कर मुख्य पुजा किला के कंमाडेट द्वारा की जाती है।

जिसमें समादेश महोदय मां गंगा से किले के सैनिक असैनिक कर्मचारियो के साथ प्रयागराजराज समस्त नागरिक के लिए सुख सम्रिदी और दीर्घायु के लिए कामना करते हैं उसी क्रम में अन्य अधिकारीगण् पूजा पाठ यज्ञ अर्चना करते हैं।


इलाहाबाद में संगम के निकट स्थित इस किले को मुगल सम्राट अकबर ने 1583 में बनवाया था। वर्तमान में इस किले का कुछ ही भाग पर्यटकों के लिए खुला रहता है। । स्रमुद गुप्त की प्रयोग प्रशस्ति पर स्रमाट अशोक ने चप्पू शैली में आज भी विराज मान ऐतिहासिकधरोहरण है

आजादी के बाद भारत सरकार का किले पर अधिकार हुआ। जिसमें किले की नींव पड़ने का वर्ष 1583 दिया है।
देश की आजादी के बाद किला भारतीय सेना के आधिपत्य की गई तथा सन 1965 में भारत सरकार द्वारा किले को खाली कराने तथा पर्यटन विभाग को देने का प्रस्ताव किया गया जिसके लिए समस्त कर्मचारी ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया तथा और मां गंगा और प्रयागराज से प्रार्थना किया कि किला को शिफ्टीग नहो और तब से अब तक इस परम्परा को करते आ रहे हैं तब से यह किला भारतीय सेना के आयुध भंडारों के लिए रखा गया तब से हर साल सैनिक व असैनिक कर्मचारिगण् इस प्रथा को हर्षोल्लास के साथ गंगा पूजा अर्चना और झंडारोहण करते आ रहे हैं।

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