संत समागम

भारत भूमि संस्कृति संस्कार की भूमि है, यहां पर सब धर्मों का आदर किया जाता है-संत राजेंद्र जी महाराज

प्रयागराज ( अनुराग शुक्ला)। माघ मेला क्षेत्र के काली मार्ग स्थित टिकर माफी शिविर में श्रीमद् भागवत सप्ताह कृष्ण कथा के विश्राम दिवस की सप्तम दिवस की कथा में व्यासपीठ पर विराजमान संत राजेंद्र जी महाराज के श्री मुख से मुख्य प्रसंग में सुदामा चरित में कहा, कि यदि धर्म पत्नी सुशीला होगी तो प्रभु द्वारिकाधीश के पास भेजेगी । इसलिए धर्म शास्त्रों में धर्मपत्नी की संज्ञा दी गई है ।

श्री सुदामा चावल लेकर के इसलिए गए। प्रभु चावल को देखकर समझ जाएंगे। हमारे मित्र के यहां गरीबी है। क्योंकि चावल रंग तो सफेद है, लेकिन चावल टूटे हुए हैं। इस भाव से इसे संत कहते हैं । चावल स्वेत होता है इसलिए प्रभु निर्मल स्वभाव वाले उसे अपनाते हैं।

आज स्वयं अपने नेत्रों के जल सो पग धोकर के ब्राह्मण का सम्मान किया। जगतपति स्वयं जगदीश द्वारिकाधीश यह सेवा कर रहे हैं। कथा की सानिध्य श्री श्री 108 श्री स्वामी हरी चेतन ब्रह्मचारी जी महाराज के शिविर काली सड़क माघ मेला में आयोजित है ।

कथा के प्रसंग में आगे संत राजेंद्र जी महाराज बताते हैं । नव योगेश्वर संवाद श्री कथा का वर्णन कलयुग के नाम की महिमा का वर्णन है। पुराणों की संस्था का वर्णन किया गया है ।

हमारे यहां चार वेद छह शास्त्र हैं । 18 पुराण हैं। भारत भूमि संस्कृति संस्कार की भूमि है। यहां पर सब धर्मों का आदर किया जाता है। सनातन धर्म सबका सत्य प्रेम का संदेश देता है ।आज कथा में मुख्य रूप से राम जन्म भूम न्यास निर्माण के अध्यक्ष स्वामी जन्मेजय शरण जी महाराज अयोध्या । जगतगुरु स्वामी घनश्याम आचार्य जी महाराज । हर्ष चैतन्य ब्रह्मचारी व्यवस्थापक टीकरमाफी। आचार्य जयप्रकाश शास्त्री । डॉक्टर आर पी मिश्रा , बृजेश अग्रवाल ,अशोक पांडे सहित संत महात्मा उपस्थित थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button