पूर्णाहुति के साथ पुरी पीठाधीश्वर के शिविर में चल रहे 11दिवसीय अनुष्ठान का समापन
अनुराग दर्शन की खास रिपोर्ट अनुराग शुक्ला के द्वारा
-1100 दुर्लभ जड़ी बूटियों और वेश कीमती गुच्छियों की दी गई आहुति
-केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों के कार्यों को सराहते हुए की गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग
प्रयागराज । पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ के पीठारोहण की रजत जयंती के उपलक्ष्य में माघ मेला में चल रहे 11 दिवसीय अनुष्ठान का अष्ट प्रहर पूजन और पूर्णाहुति के साथ आज दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में समापन हो गया। हवन में 1100 प्रकार की दुर्लभ जड़ी बूटियों और वेश कीमती गुच्छियों की आहुति दी गई।

इस अवसर पर पुरी पीठाधीश्वर स्वामी अधोक्षजानंद ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से गौवध पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की। हालांकि उन्होंने दोनों सरकारों के कार्यों की सराहना भी की और कहा कि संयोग से इस समय केंद्र और प्रदेश में उन्हीं लोगों की सरकारें हैं, जो गाय और गंगा के संरक्षण और संवर्धन की बात करते रहे हैं।
जगद्गुरु देवतीर्थ ने कहा कि उनके गुरु और पुरी के ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी निरंजन देवतीर्थ ने जिस गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर अनशन किया था अब उसे पूरा करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि स्वामी निरंजन देवतीर्थ के अलावा करपात्री जी महाराज और संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जैसे तत्कालीन महान देवतुल्य विभूतियों ने भी गाय और गंगा के लिए अपने जीवन की आहुति दी है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि अब गौबध को पूर्ण रुप से प्रतिबंधित कर दे। यही उन महान विभूतियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अपने उद्बोधन के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गोवंश के संरक्षण की दिशा दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उनके प्रयास से उत्तर प्रदेश में काफी हद तक गौहत्या पर रोक लग गई है। वह गोवंश पालन की सुदृढ व्यवस्था में भी लगे हैं। स्वामी जी ने आज अपने संकल्प को फिर दोहराया कि जब तक देश में गौबध पूर्णतया बन्द नहीं होता है और गौपालन की समुचित व्यवस्था पूरी नहीं होती है तब तक वह पीठ के आचार्य छत्र और सिंहासन को धारण नहीं करेंगे।
अनुष्ठान समापन कार्यक्रम के अवसर पर पुरी पीठाधीश्वर देवतीर्थ महाराज ने शिविर में जुटे भक्तों और श्रद्धालुओं से कहा कि सनातन धर्म को कुछ विधर्मी ताकतें क्षति पहुंचाने की कोशिश में लगी हैं। हमें उनसे सावधान रहने की जरूरत है। किसी के बहकावे में नहीं आना है। स्वामीजी ने एक बार फिर केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों के कार्यों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि इन सरकारों से सनातन धर्म के उन्नयन का सकारात्मक फल अवश्य मिलेगा।
समापन कार्यक्रम में असम से भाजपा सांसद दिलीप सैकिया भी सपरिवार उपस्थित थे। इस अवसर उन्होंने तीर्थराज प्रयाग की महिमा बखान करते हुए कहा कि पवित्र संगम में परिवार समेत स्नान कर वह स्वयं को धन्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रयागराज का जो महत्व बताया है वह आने पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो जाता है। इसके लिए उन्होंने पुरी पीठाधीश्वर स्वामी अधोक्षजानंद महाराज के प्रति आभार भी जताया। कहाकि उन्हीं की कृपा से ही उनको और उनके परिवार को पापनाशिनी मां गंगा के साथ ही तमाम साधु-संतों का दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ के पीठारोहण की रजत जयंती का कार्यक्रम माघ मेला स्थित शिविर में बसंत पंचमी से प्रारम्भ हुआ था। इस 11 दिवसीय अनुष्ठान में चारों वेदों एवं प्रस्थानात्रयी का पारायण पूर्ण किया गया। राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की महाआराधना, नित्य सहस्त्रार्चन एवं भगवान चंद्रमौलेश्वर का नित्य महारुद्राभिषेक चल रहा था। सुबह शाम शुरू हुआ अनुष्ठान अंतिम दिन अष्ठ प्रहर पूजन के रूप में तब्दील हो गया।
अनुष्ठान में देश के विभिन्न क्षेत्रों के तमाम राजनेताओं और धर्माचार्यों ने शिरकत की। इनमें असम के सांसद दिलीप सैकिया, जम्मू कश्मीर सरकार के पर्यटन एवं ग्राम्य विकास विभाग के निदेशक सुदर्शन कुमार सलगोत्रा, प्रयागराज के करछना विधायक और उप्र सरकार के पूर्व मंत्री उज्जवल रमण सिंह और असम राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद मुमीनुल ओवाल प्रमुख रहे। 11 दिवसीय इस अनुष्ठान में तरह-तरह के धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। कल जगद्गुरु का नागरिक अभिनंदन भी किया गया था।
इससे पहले भजन-कीर्तन का कार्यक्रम आयोजित था। आज रविवार को 11 दिवसीय इस अनुष्ठान का विधि विधान के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर 1100 दुर्लभ जड़ी बूटियों और वेश कीमती गुच्छियों की आहुति दी गई। इस दौरान पूरा शिविर वैदिक मंत्रों की ध्वनियों और सनातन धर्म के जयघोष से गुंजायमान हो गया। अनुष्ठान के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि 25 साल पहले वर्ष 1995 में प्रयाग अर्ध कुम्भ के अवसर पर बसंत पंचमी के ही दिन स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ का पुरी पीठ के 145वें पीठाधीश्वर के रुप में अभिषेक हुआ था। इस पीठ के प्रथम आचार्य आद्य शंकराचार्य के पहले शिष्य स्वामी पद्मपाद थे। पीठारोहण के बाद जगद्गुरु देव तीर्थ ने आद्य शंकराचार्य की परंपरा का पालन करते हुए पूरे देश में संस्कार यात्रा निकाली थी। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर भारत और कश्मीर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में समाज से भटके लोगों के बीच बहुत काम किया और अपनी संस्कार यात्रा के माध्यम उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा। इसके अलावा धर्मान्तरण को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए स्वामी देवतीर्थ देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार यज्ञों का आयोजन भी करते रहते हैं।
आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद की उच्च समिति ने शंकराचार्य देवतीर्थ के पीठारोहण की रजत जयंती को साल भर देश के विभिन्न भागों में मनाने का निर्णय लिया है। इस रजत जयंती वर्ष में जगह-जगह भगवान चंद्रमौलेश्वर का अभिषेक, आद्य शंकराचार्य की पादुका का पूजन, संत सम्मेलन और यज्ञादि अनुष्ठान सम्पन्न होंगे। साथ ही देश भर में आद्य शंकराचार्य भगवान के संदेश प्रसारित किये जाएंगे।



