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गंगा-किसानों की समस्याओं का तुरंत हो समाधान

इलाहाबाद । (अनुराग शुक्ला) माघ मेला त्रिवेणी संगम स्थित साकेत धाम आश्रम में NDF – नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुन्ना यादव द्वारा गंगा व किसान की व्यथा और दशा पर प्रकाश डालने के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें भारी संख्या में साधू –संत व नागरिक उपस्थित थे ।

इस संगोष्ठी में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए मुन्ना यादव जी ने कहा कि देश में कोई भी सरकार हो लेकिन गंगा की सफाई और किसान की भलाई के बारे में अब तक कोई ठोस योजना सरकार नहीं बना पाई हैं जिसकी वजह से जहाँ एक ओर गंगा की सफाई नहीं होने से वह लुप्त होने के कगार पर पहुँच गई हैं, वहीँ दूसरी ओर किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिलने की वजह से किसान आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहे हैं।

यह सब सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है , जिसकी वजह से आज माँ के समान मानी जाने वाली गंगा प्रदूषण के भंवर में फंसी हुई हैं वहीँ दूसरी ओर अन्न दाता कहा जाने वाला किसान अपनी बदहाली को लेकर व्यथित है ।

इस संगोष्ठी के मुख्य अथिति महामंडलेश्वर संतोष दास ( सतुआ बाबा ) ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि संत किसी एक का नहीं होता है वह सारे जगत का होता है ,चाहे किसी की भी सरकार रही हो, सनातन धर्म सभी की बात करता है और समाज की भलाई के लिए हमेशा चिंतन करता है ,इस देश को बचाए रखने के लिए गंगा और किसान दोनों की जरूरत है यह दोनों ही नहीं रहेंगे तो देश भी नहीं रहेगा, राम मन्दिर के निर्माण के लिए जो भी दावे किए गए उसे अब तक पूरा नहीं किया गया है। इसलिए यह भी एक चिन्तन का विषय है, सनातन धर्म में हिटलरशाही नहीं चलेगी इस बात को सरकार को ध्यान में रखना चाहिए ।

संगोष्ठी के संरक्षक स्वामी रामसुभग देव ( बिनैका बाबा महाराज ) ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि गंगा मैली क्यों है ? यह सभी के लिए सोचने का विषय है , पूर्व की सरकारों ने गंगा में बाँध बनाकर उसके जल के प्रवाह को रोकने जैसा काम किया है ,जिसकी वजह से गंगा का जल प्रवाह बाधित हुआ है। कुम्भ से पहले गंगा को स्वच्छ व निर्मल करने का समय सरकार और प्रशासन को हमारी ओर से दिया जा रहा है यदि यह काम नहीं हुआ तो सरकार और प्रशासन को अपनी गलती का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

महाराज ने कहा कि सरकार को किसानों की बदहाली को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए,साथ ही गौरक्षा के लिए भी विशेष योजना बनानी चाहिए।

संगोष्ठी में आए आशीष दास जी महाराज ने कहा कि गंगा हमारे लिए प्राण है और किसान हमारे लिए आधार हैं इसलिए इन दोनों की सुरक्षा करना हमारा काम है इसलिए आज हमें फिर से एक भागीरथ की जरूरत है इसी कड़ी में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए स्वामी अमृतदास महाराज ने कहा कि गंगा की सुरक्षा के लिए हमें अपने रवैए को बदलना पड़ेगा,हम बदलेंगे तो देश बदलेगा, वहीँ महंत जगत राम दास जी महाराज ने भाजपा सरकार पर तीखे शब्दों से प्रहार किया।

उन्होंने कहा कि गंगा की सफाई के लिए करोंड़ों रूपए आता है लेकिन यह कहाँ खर्च होता है इसका पता अब तक नहीं चल पाया है इसलिए यह जांच का विषय है ,इस संगोष्ठी में मानस केसरी महाराज व रसिक जन्मेजय सरण दास जी महाराज ने भी गंगा और किसानो की बदहाली पर प्रकाश डाला ।
संगोष्ठी में महंत श्री नरोत्तम दास, आचार्य मुकेश दास जी, महंत जगतराम दास ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।

समारोह का संचालन फूलचंद दुबे, अवधेश द्विवेदी ने किया, समारोह में अतिथि के रूप में सरद श्रीवास्तव व पूर्व चिकित्सा अधिकारी पी के सिन्हा, पूर्व सभासद सतीश केशरवानी आदि उपस्थित थे , संगोष्ठी का समापन करते हुए बाबा मस्तराम दास ने गंगा और किसानों के बारे में अपने विचारों को व्यक्त करने के बाद सभी अतिथियों व उपस्थितियों का आभार व्यक्त किया ।

धन्यवाद .

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