ज्योतिष अंधविश्वास से दूर रहता है-ज्योतिषाचार्य दीपाली
प्रयागराज (अनुराग शुक्ला)। सबसे पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि ज्योतिष के साथ मेरा लक्ष्य क्या है? क्योंकि यहां हमारे चारों ओर बहुत अधिक संख्या में लोग हैं जिनके पास एक ही पदनाम और डिग्री है, लेकिन हर किसी की सोच और लक्ष्य अलग है। और यही वह चीज है ।जो हमें ‘’विशेष’’ बनाती है। मैं यहां अपनी संस्कृति और उसकी स्वाभाविकता को बचाने के उद्देस्य से हूँ। यह कहना है प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य दीपाली का।
दीपाली कहतीं हैं कि ,वेद के छः अंग हैं, जिसमें छठा अंग ज्योतिष हैI विज्ञान जहां समाप्त होता है, वहां से ज्योतिष शुरू होता है, यह वेद सम्मत विज्ञान है। ज्योतिष लोगों को अंधविश्वास ही ओर नहीं ले जाता, बल्कि लोगों को जागरूक करता है।
ज्योतिष समय का विज्ञान है, इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण [{(पंचांग)}]इन पांच चीजों का अध्ययन कर भविष्य में होने वाली घटनाओं की जानकारी दी जाती है। यह किसी जाति या धर्म को नहीं मानता। हमने पूर्व जन्म में क्या किया और वर्तमान में क्या कर रहे हैं, इसके आधार पर भविष्य में क्या परिणाम हो सकते हैं, इसकी जानकारी दी जाती है। ग्रहों से ही सब कुछ संचालित होते हैं। इसी से ऋतुएं भी बनती हैं। सूर्य पृथ्वी से दूर गया तो ठंड का मौसम आ गया और पास आने पर गर्मी बढ़ गई। ज्योतिष के अनुसार व्यक्तित्व को दो भागों में विभाजित किया है, पहला-बाह्य व्यक्तित्व और दूसरा-आन्तरिक व्यक्तित्व.सौरमण्डल के सातों ग्रह उपरोक्त दोनों व्यक्तित्वओं को अपने अपने गुण धर्म के अनुसार प्रभावित करते हैं, जीवन के भाव, विचार, रूप, व्यक्तित्व, यादें, प्रवॄत्ति, न्याय, अन्याय, सत्य, असत्य, प्रेम, कला, आदि जितने भी जीवन के कारण हैं, सब के सब ग्रहों के प्रभाव से ही बनते बिगडते रहते हैं, सात ग्रह तो प्रत्यक्ष है और दो छाया ग्रह हैं, इस प्रकार से वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों का विवेचन मिलता है।
हम आपको ज्योतिष के 3 तरीकों में सुझाव देते हैं- वास्तु / फेंगशुई / वैदिक– अiपने मंदिर में भगवन की स्तुति की ये वैदिक हो गया, परिक्रमा लगायी ये वास्तु हो गया और मंदिर में घंटा बजाया ये फेंगसुई हो गयाI और ज्योतिष को विज्ञान की प्रत्येक कसौटी पर खरा उतरने के लिए ही में प्रयासरत हूँ।

