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फुलप्रूफ जांच के बाद ही मिलेगी नियुक्ति

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । नियुक्ति पत्र के फर्जीवाड़े के मामले में फंस चुका उच्च शिक्षा निदेशालय अब फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहा है। शायद यही वजह है कि असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा (उशिसे) आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या 47 के तहत चयनित हिंदी व राजनीति शास्त्र विषय के अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग के बाद निदेशालय ने अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों के प्रबंधक व प्राचार्य को पत्र जारी करके निर्देश दिया गया है।

कि आसन व्यवस्था से संबंधित पत्र हिंदी में बनाया गया है। अंग्रेजी भाषा में कोई पत्र नहीं बना है। अभ्यर्थी अगर कोई नियुक्ति पत्र देते हैं तो उसके आधार पर ज्वाइनिंग न कराई जाए।
साथ ही ऐसे अशासकीय सहायता प्राप्त सभी डिग्री कॉलेजों को बताया गया है कि हिंदी भाषा में बने आसन-व्यवस्था संबंधी पत्र पर सहायक निदेशक उच्च शिक्षा या संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा प्रयागराज द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।

प्रमाणित पत्र अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र की प्रतिलिपि के साथ संलग्न कर उच्च शिक्षा निदेशालय से भेजा जाएगा, उसी के आधार पर चयनितों को कार्यभार ग्रहण कराया जाए। वहीं, संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि उच्च शिक्षा निदेशक कार्यालय द्वारा प्रेषित प्रमाणित पत्र प्राप्त करने के बाद ही संबंधित चयनित अभ्यर्थी के वेतन का भुगतान किया जाए।


उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या 47 के तहत निदेशालय ने 28 फरवरी को अंग्रेजी के 147, शारीरिक शिक्षा के 60, अर्थशास्त्र के 33, इतिहास के 38, भूगोल के 48, चित्रकला विषय के दो पदों की ऑनलाइन काउंसिलिंग कराकर चयनितों का नियुक्ति पत्र वेबसाइट में अपलोड कर दिया था।

चयनितों का नियुक्ति पत्र हिंदी में बनाया गया था। लेकिन, शारीरिक शिक्षा के चयनितों के पास से अंग्रेजी में लिखा नियुक्ति पत्र मिला। अंग्रेजी, अर्थशास्त्र व शारीरिक शिक्षा विषय में कई फर्जी नामों से नियुक्ति पत्र बनाने की शिकायत हुई। इसका परिणाम यह हुआ कि कई चयनितों को अभी तक नियुक्ति नहीं मिल पायी है।

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