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आचरण में सम्यकत्व धारण करना ही है संयम धर्म- आचार्य विपुल सागर

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। नगर के विभिन्न जैन मंदिरो में शुक्रवार को दसलक्षण महापर्व के उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच एवं उत्तम सत्य दस धर्मो के अंतर्गत छंठवे धर्म उत्तम संयम धर्म की पूजा, भगवान की शांति धारा एवं अभिषेक कोरोना महामारी की विनाश की भावना से की गई। इस अवसर पर जैन अनुयायियों ने उत्तम संयम धर्म को अंगीकार कर सुगंध दशमी पर्व मनाया। सभी जैन मंदिरों में जैन अनुयायियों ने धूप चढ़ाकर अपने कर्मों का क्षय किया। तपस्थली में विराजमान विपुल सागर महाराज ने बताया कि जिस मनुष्य ने अपने जीवन में संयम धर्म धारण कर लिया है, उसका मनुष्य जीवन सफल है। मन की प्रवृत्ति को समझकर हम इसके मालिक बने गुलाम नहीं। कार्यक्रम में अशोक जैन, ब्रजेश जैन, दीपक जैन,राहुल जैन, विमल जैन , राकेश जैन, अजय जैन, सुनील जैन, रमेश जैन, बाला जैन, खुसबू जैन, सलोनी जैन, माधुरी जैन, मंजू जैन, गीतिका जैन, अर्चना जैन, ज्योति जैन आदि सम्मिलित रहे। कल 29 अगस्त दिन शनिवार को उत्तम तप धर्म की पूजा की जायेगी।

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