आवारा पशुओं को शहर से करें बाहर: हाईकोर्ट का नगर निगम प्रयागराज को निर्देश

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । सड़कों पर घूमने वाले जानवरों व कुत्तों को शहर से बाहर किया जाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर निगम प्रयागराज को यह आदेश दिया। साथ ही यह सवाल भी किया कि फिजिकल डिस्टेंंिसंग व मास्क की अनिवार्यता को निगम प्रशासन कैसे लागू करेगा। इसको लेकर पुलिस क्या काम कर रही है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा व न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
हाईकोर्ट ने नगर निगम के सभी सभासदों को पुलिस, एनसीसी व भारत स्काउट वालंटियर्स के साथ घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने और कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को इस संबंध में प्रशिक्षण की व्यवस्था करने को कहा है। इसकी कार्य योजना 31 अगस्त को पेश करने का निर्देश दिया है, जिससे वह व्यवस्था प्रदेश के अन्य शहरों की लागू कराई जा सके।
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पार्थिव शरीर न देने पर जांच का निर्देश
प्रयागराज। सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता सुनील चैधरी ने बताया कि कानपुर नगर में कोरोना के एक मरीज की निजी अस्तपाल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। मृतक के परिजनों ने 11 लाख रुपये दे दिया है। लेकिन, अस्तपाल प्रबंधन ने पार्थिव शरीर नहीं दिया। कहा कि साढ़े 14 लाख रुपये देने पर ही पार्थिव शरीर दिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी कानपुर नगर को जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही प्राइवेट अस्पतालों को कोरोना इलाज में शामिल करने की मांग में दाखिल अर्जी पर सरकारी अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधाओं न होने के तथ्य पेश करने को कहा है।
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मरीज से खराब व्यवहार की शिकायत
प्रयागराज। अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने लखनऊ के कोरोना मरीज के साथ लापरवाही का मुद्दा उठाया। पीड़ित राधेश्याम दीक्षित के साथ अस्पताल में दुव्र्यवहार किया गया है। कोर्ट ने कहा कि राधेश्याम ने जिलाधिकारी लखनऊ से शिकायत की है, उसकी जांच करके जांच रिपोर्ट पेश की जाय। वहीं, एमबीबीएस मास्टर डिग्री ले रहे छात्रों को लेबल थ्री श्रेणी के अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टर की सेवाएं लेने की मांग में दाखिल अर्जी पर कोर्ट ने राज्य सरकार से विचार करके बताने को कहा है।


